राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 4 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले दिन इंटर्न डॉक्टरों ने शहर में बाइक रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

मेकाहारा परिसर से शुरू हुई बाइक रैली देवेंद्र नगर चौक, घड़ी चौक और मरीन ड्राइव होते हुए पुनः उसी मार्ग से वापस चिकित्सा महाविद्यालय पहुंची। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग दोहराई।


स्टाइपेंड 15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग

इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग वर्तमान में मिलने वाले 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न्स को मिलने वाला स्टाइपेंड देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है।

डॉक्टरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में करीब 43 हजार रुपये, ओडिशा में लगभग 42 हजार रुपये और बिहार में करीब 27 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है। वहीं कई अन्य राज्यों में भी इंटर्न डॉक्टरों को 30 हजार से 45 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड मिल रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के इंटर्न डॉक्टर भी अपने कार्यभार और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।

24-24 घंटे की इमरजेंसी ड्यूटी का दिया हवाला

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे 24-24 घंटे तक लगातार इमरजेंसी ड्यूटी करते हैं और कई बार लगातार ड्यूटी के बाद भी ओपीडी में मरीजों की सेवा देते हैं। इसके अलावा इंटर्न डॉक्टर CCU, ICU, PICU, SICU, इमरजेंसी, वार्ड और अन्य गंभीर रोगी देखभाल इकाइयों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं देते हैं। उनका कहना है कि इतने अधिक कार्यभार के बावजूद उन्हें अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड मिल रहा है।

सरकार से शांतिपूर्ण समाधान की अपील

इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव या स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं है, बल्कि राज्य सरकार का ध्यान उनकी वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि MBBS इंटर्न डॉक्टरों के कार्यभार, जिम्मेदारियों और अन्य राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।

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