
क्या आप जानते हैं कि मौत के बाद की दुनिया कैसी दिखती है? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए लोग सदियों से रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन रोमफोर्ड, ईस्ट लंदन के रहने वाले मैथ्यू एलिक के पास इस बारे में एक ऐसा जवाब है, जो आपको निराश कर सकता है. यकीनन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि 43 साल के मैथ्यू, जो एक पिता, एक्टर और मॉडल हैं, अगस्त 2023 में करीब 10 मिनट के लिए क्लीनिकली डेड घोषित कर दिए गए थे.
उस वक्त उन्हें एक बहुत बड़ा हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी सांसें थम गईं और दिल ने धड़कना बंद कर दिया था. मैथ्यू को सांस लेने में दिक्कत और पैरों में सूजन की वजह से अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिल और फेफड़ों में क्रिकेट की गेंद के आकार के खून के थक्के जम गए थे.

पल्मोनरी एम्बोलिज्म की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वे वहीं गिर पड़े. डॉक्टरों ने उन्हें वापस लाने के लिए डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल किया और इतनी ताकत से सीपीआर दिया कि उनके शरीर के अंदर ब्लीडिंग होने लगी. लगभग 10 मिनट तक क्लीनिकली डेड रहने के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें होश में ला दिया और फिर वे तीन दिनों तक कोमा में रहे.


मौत का वो ‘निराश’ करने वाला अनुभव
मैथ्यू जब कोमा से बाहर आए, तो उनसे सबसे पहला सवाल यही पूछा गया कि उन्होंने ‘दूसरी दुनिया’ में क्या देखा? मैथ्यू का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी याद नहीं है. उनके मुताबिक, मौत का अनुभव किसी दिव्य रोशनी या स्वर्ग जैसा नहीं था, बल्कि यह एक बेहद शांतिपूर्ण नींद से जागने जैसा महसूस हुआ. मैथ्यू का यह खुलासा उन लोगों के लिए निराशाजनक हो सकता है, जो मौत के बाद किसी जादुई दुनिया की उम्मीद करते हैं.
जिंदगी की चुनौतियों से मुकाबला
मौत के मुंह से वापस आने के बाद मैथ्यू की जिंदगी आसान नहीं थी. पिछले दो सालों में उन्होंने एक रिश्ता टूटने, नौकरी जाने, आर्थिक तंगी और अपने बेटे की खराब सेहत जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया. लेकिन मैथ्यू का कहना है कि जब आप मौत को हरा देते हैं, तो कोई भी चुनौती आपको डरा नहीं सकती. उन्होंने रोने और हार मानने के बजाय खुद को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया. आज वे अपनी बेस्ट फ्रेंड से सगाई कर चुके हैं, दोनों ने अपना घर खरीद लिया है और उनके बच्चे भी लाइफ में अच्छा कर रहे हैं.
किताब के जरिए दी नई प्रेरणा
मैथ्यू ने अपनी मौत और उसके बाद के 18 महीनों के संघर्ष को एक किताब ‘लाइफ आफ्टर बीइंग क्लीनिकली डेड’ बताया है. डिस्लेक्सिया (पढ़ने-लिखने की बीमारी) होने के बावजूद उन्होंने डिक्टाफोन में बोलकर अपनी कहानी लिखी और आज उनकी किताब की 1,000 से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं.
मैथ्यू अब मोटिवेशनल स्पीच देते हैं और ब्लड फाउंडेशन के साथ काम करते हैं, क्योंकि 7 बार खून चढ़ने की वजह से ही उनकी जान बच पाई थी. मैथ्यू की सेहत अब पहले जैसी नहीं रही और उन्हें पूरी उम्र खून पतला करने वाली दवा लेनी होगी, लेकिन वे अपनी कमियों पर नहीं बल्कि अपनी काबिलियत पर ध्यान दे रहे हैं. उनका मानना है कि जिंदगी बहुत छोटी है और हमें हर पल का लुत्फ उठाना चाहिए.
