'साइको सीरियल किलर': शराब में सुहागा मिलाकर 4 महीने में ली 8 जानें, पहले कुत्ते पर किया था जहर का टेस्ट

बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। कसडोल थाना क्षेत्र के ग्राम खरवे में पिछले चार महीनों से हो रही रहस्यमयी मौतों के पीछे गांव का ही एक ‘साइको किलर’ निकला। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी हर मौत के बाद होने वाली अंतिम यात्रा में सबसे आगे चल रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

पुलिस ने इस सीरियल किलर रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने छोटी-छोटी रंजिश, अंधविश्वास और मानसिक कुंठा के कारण अपने ही परिचित 8 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।


पहले कुत्ते पर किया ‘डेथ टेस्ट’

पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है। आरोपी रामसहाय ने इंसानों को निशाना बनाने से पहले एक कुत्ते पर जहर का परीक्षण किया था। जब कुत्ता मर गया और उसका ‘टेस्ट’ सफल रहा, तो उसने एक-एक कर ग्रामीणों को निशाना बनाना शुरू किया। वह लोगों को अपने साथ बैठाकर शराब पिलाता था और मौका पाकर उसमें सुहागा (जहरीला पदार्थ) मिला देता था।

कफन-दफन में भी होता था शामिल

ग्रामीणों और पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी बेहद शातिर चाल चलता था। जहर देने के बाद जब पीड़ित की तबीयत बिगड़ती थी, तो वह खुद उसे अस्पताल ले जाने में मदद करता था। इतना ही नहीं, मौत हो जाने के बाद वह कफन-दफन और अंतिम संस्कार के रीति-रिवाजों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था ताकि कोई उस पर उंगली न उठा सके।

ऐसे खुला 8 मौतों का राज

फरवरी से मई 2026 के बीच ग्राम खरवे में लगातार 8 मौतें हुईं, जिससे गांव में दहशत का माहौल था। आखिरकार 6 जून 2026 को ग्रामीणों ने एकजुट होकर कसडोल एसडीओपी को आवेदन दिया और रामसहाय पर शक जताया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 7 मृतकों के शवों को कब्र से निकलवाया और फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर भेजा (एक मृतक का दाह संस्कार हो चुका था)। वैज्ञानिक साक्ष्यों और कड़ी पूछताछ के बाद आरोपी टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया।

कातिल की ‘डेथ लिस्ट’: किसे क्यों मारा?

आरोपी रामसहाय ने जिन 8 लोगों को शिकार बनाया, उनके पीछे की वजहें बेहद मामूली थीं:

  • 6 फरवरी (बद्री पटेल): गाली-गलौज और शराब को लेकर हुआ विवाद।
  • 20 फरवरी (बुठालु साहु): सामाजिक और चुनावी रंजिश का बदला।
  • 12 मार्च (छत्तु साहु): आरोपी को शक था कि वह उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता है।
  • 20 मार्च (बुधराम जायसवाल): जमीन और आपसी रंजिश।
  • 31 मार्च (विनोद कुमार साहु): लगातार अपमान और तानों का बदला।
  • 28 अप्रैल (गजानंद मांझी): आरोपी को संदेह था कि वह उस पर जादू-टोना (बैगा-गुनिया) करता है।
  • 29 अप्रैल (चैतुराम साहु): 50 हजार रुपए के कर्ज और ब्याज से छुटकारा पाने के लिए।
  • 14 मई (महेतरू राम साहु): चुनावी रंजिश और ताने मारने पर हत्या।

एक की बची जान: आरोपी ने कार्तिक कुम्हार नाम के ग्रामीण को भी जहर दिया था, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।

पुलिस की सूझबूझ से सलाखों के पीछे आरोपी

शुरुआत में आरोपी पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन तकनीकी सबूतों और ग्रामीणों के बयानों के आगे उसकी एक न चली। पुलिस ने आरोपी रामसहाय जायसवाल के खिलाफ 8 हत्याओं और 1 हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। इस पेचीदा मामले को सुलझाने में कसडोल पुलिस की वैज्ञानिक जांच और धैर्य की तारीफ हो रही है।

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