रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनिज कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा डिजिटल बदलाव किया है। ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू होने के बाद अब खदान संचालकों को रॉयल्टी पर्ची के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रॉयल्टी और ई-ट्रांजिट पास की सुविधा 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इससे न केवल समय और लागत बचेगी, बल्कि सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगेगा।

नई व्यवस्था के तहत खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। अधिकारियों का दावा है कि इससे अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग और बिना परमिट खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। पहले जहां मैनुअल प्रक्रिया के कारण देरी और अनियमितताओं की शिकायतें आती थीं, वहीं अब हर ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे कभी भी जांचा जा सकेगा।

डीएमएफ फंड पर डिजिटल निगरानी

जिला खनिज संस्थान न्यास फंड, जिसमें हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं, उसे लेकर भी सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। पहले इस फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। अब ‘डीएमएफ 2.0’ पोर्टल के जरिए सभी प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृतियां ऑनलाइन होंगी। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि पैसा किस योजना में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया।


रेत खदानों में एक समान नीति

रेत खदानों को लेकर राज्य में लंबे समय से अलग-अलग नियमों के कारण उपलब्धता और कीमतों में असंतुलन था। अब ‘वन स्टेट-वन पॉलिसी’ लागू कर दी गई है। खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग से किया जा रहा है और अब तक करीब 200 नई खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है।

बस्तर में आदिवासियों को सीधा फायदा

बस्तर संभाग में टिन संग्रह करने वाले आदिवासी परिवारों के लिए सरकार ने खरीदी दर 640 रुपए से बढ़ाकर 2800-2900 रुपए प्रति किलो कर दी है। साथ ही नकद भुगतान की जगह अब आधार आधारित सिस्टम से सीधे बैंक खाते में राशि दी जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आदिवासियों की आय में सीधा इजाफा होगा।

खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर खनिज विभाग में डिजिटल मानिटरिंग और आनलाइन सिस्टम लागू किया गया है। इससे पूरे सेक्टर में नियंत्रण मजबूत हुआ है। जमीनी स्तर पर अवैध खनन और स्थानीय स्तर की अनियमितताओं में कमी आई हैं।

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