



भारत ने पीओके को लेकर एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जमकर धोया है। दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों के निरंतर दमन और मौलिक स्वतंत्रता के हनन की कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में चल रही घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि कैसे ये घटनाएं पाकिस्तान के वास्तविक स्वरूप को पूरी तरह उजागर करती हैं।
‘आठ दशकों से रची गई साजिश का हिस्सा’
राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा, “दुनिया पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता के निरंतर दमन और मौलिक स्वतंत्रता के हनन की गवाह है। ये कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा लगभग आठ दशकों से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सिलसिला पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों तक भी फैला हुआ है, जहां दमन जारी है। उन्होंने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री समेत नेताओं की कैद, मुख्य विपक्षी दल पर चुनावी प्रतिबंध, 27वें संशोधन के जरिए सेना द्वारा संवैधानिक तख्तापलट और इस तरह की अन्य कार्रवाइयों ने लोकतंत्र की हर झलक को मिटा दिया है।”
कहानी गढ़ने के बजाय आत्मनिरीक्षण करे पाकिस्तान
राजदूत हरीश ने आगे कहा, “पाकिस्तान को घरेलू स्तर पर वाहवाही बटोरने और संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सदस्य देशों को गुमराह करने के उद्देश्य से धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए मनगढ़ंत कहानी गढ़ने के बजाय, आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
उन्हें देश की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “अन्य देशों में इसी तरह की घटनाओं की संयुक्त राष्ट्र द्वारा कड़ी निंदा की जाती है, पाकिस्तान में इस तरह के दमन और घटनाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए।”
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग
राजदूत हरीश ने विभाजनकारी एजेंडे के लिए इस प्रतिष्ठित मंच का दुरुपयोग करने के पाकिस्तान के दुस्साहसी प्रयास की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग रहा है, है और रहेगा।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “यह संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करना चुनता है। जम्मू और कश्मीर के संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत की संप्रभु भूमि पर किया गया खुला आक्रमण और अवैध कब्जा है।”
