कांगो में इबोला वायरस ने कहर बरपा रखा है। यहा इस वायरस के प्रकोप से कम से कम 999 लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुल 2,473 मामले सामने आए हैं। इनमें से 737 मरीज फिलहाल पृथकवास केंद्रों और अस्पतालों में भर्ती हैं। इबोला को इतिहास में सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप घोषित किया जा चुका है।

न इलाज, न टीका

कांगो में 15 मई को घोषित प्रकोप पहले के ज्यादातर इबोला प्रकोपों ​​से अलग है, क्योंकि इसके लिए जिम्मेदार वायरस के बुंडिबुग्यो स्वरूप के लिए कोई टीका या इलाज मौजूद नहीं है। इस प्रकोप में अब तक दर्ज किसी भी इबोला प्रकोप की तुलना में अधिक लोगों की कम समय में मौत हुई है। इसमें वर्ष 2013-2016 का वह प्रकोप भी शामिल है, जिसे कम से कम 28,000 मामलों में से 11,000 से अधिक मौतों के साथ अब तक का सबसे भीषण इबोला प्रकोप माना जाता है।


कुछ समय में ही बढ़ा मौतों का आंकड़ा

इबोला के प्रकोप की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज कुछ समय में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब पहुंच गया है। इससे पहले वर्ष 2013 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला का प्रकोप सबसे घातक माना जाता था। उस दौरान करीब 28 हजार मामले सामने आए थे और 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। उस प्रकोप में मृतकों की संख्या 1,000 तक पहुंचने में करीब आठ महीने लगे थे।

अधिकारियों की मानें तो इबोला के नए मामलों में करीब 80 प्रतिशत संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल पाया है। इसे स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था की क्षमता से भी तेज गति से फैल रहा है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस?

इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। यह एक गंभीर बीमारी है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित होती है। संक्रमण के केंद्र इतुरी प्रांत के अलावा चार अन्य प्रांतों में भी मामले सामने आए हैं। वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों और राहत टीमों पर हमलों के कारण कुछ इलाकों से स्वास्थ्यकर्मियों और सहायता संगठनों को हटना पड़ा है। कई स्वास्थ्यकर्मी वेतन नहीं मिलने की शिकायत को लेकर हड़ताल पर भी चले गए हैं।

अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया ने प्रकोप पर चिंता जताते हुए नियंत्रण के प्रयास तेज करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इबोला के प्रसार को नहीं रोका गया, तो यह दुनिया के सबसे घातक इबोला प्रकोपों में शामिल हो सकता है।

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