



Gold-Silver Price Today: भारतीय वायदा बाजार (MCX) में बीते दो दिनों के भीतर सोने और चांदी की कीमतों ने जबरदस्त छलांग लगाई है। महज 48 घंटे के कारोबार में सोना करीब 5,750 रुपए प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया। बुधवार देर रात कारोबार बंद होने तक MCX पर सोना बढ़कर 1,48,650 रुपए के स्तर पर पहुंच गया, जबकि दो दिन पहले यह 1,42,900 रुपए के आसपास था। सोने की ही राह पर चलते हुए चांदी ने भी रफ्तार पकड़ी है और इस दौरान करीब 11,084 रुपए प्रति किलो उछलकर 2,27,490 रुपए के स्तर को छू लिया।
ऑल टाइम हाई से अब भी सस्ते हैं सोना-चांदी
भले ही पिछले दो दिनों में सोने-चांदी की दरों में यह तेज उछाल देखने को मिला हो, लेकिन अगर आप इनकी तुलना पिछले रिकॉर्ड स्तरों से करेंगे तो ये अब भी काफी किफायती दामों पर मिल रहे हैं। एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 29 जनवरी को सोना अपने रिकॉर्ड हाई 1,93,096 रुपए पर था, जहां से यह आज भी करीब 44,446 रुपए सस्ता मिल रहा है। ठीक इसी तरह, चांदी भी अपने ऑल टाइम हाई 4,20,048 रुपए प्रति किलो के मुकाबले करीब 1,92,458 रुपए नीचे कारोबार कर रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी चमका सोना
भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के रेट में जोरदार उछाल देखा जा रहा है। वैश्विक बाजार में सोना 1 प्रतिशत से अधिक की मजबूती के साथ 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। इससे एक दिन पहले भी इसमें 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी। वहीं चांदी भी बढ़त के साथ 62 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती नजर आई। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर आ रही पॉजिटिव खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों के दबाव को कम कर दिया है, जिससे सोने को मजबूती मिली है।
अमेरिका-ईरान वार्ता और ट्रम्प के बयान का बाजार पर असर
सोने के दामों में आई इस अचानक तेजी के तार वैश्विक कूटनीति से भी जुड़े हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के बाद बाजार की धारणा बदली है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है और वे किसी सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समझौते से मामले को सुलझाने के पक्ष में हैं। इस बयान से निवेशकों को उम्मीद जगी है कि महीनों से चला आ रहा संकट टल सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों को बड़ी राहत मिली है।
ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों का बदलता मूड
फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संकट के बाद सोने की कीमतों में काफी गिरावट देखने को मिली थी, क्योंकि तेल के दाम बढ़ने से महंगाई का डर बढ़ा था और केंद्रीय बैंकों (फेडरल रिजर्व) द्वारा लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि, अब सुलह के संकेतों के चलते निवेशकों को लग रहा है कि इस साल के अंत तक अमेरिका में ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी नहीं होगी। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें घटने या स्थिर रहने की संभावना हमेशा बुलियन मार्केट के लिए बड़े बूस्टर का काम करती है।
