बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में आरक्षकों की पदोन्नति से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने विभाग को पदोन्नति की विभागीय प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक के पक्ष में अंतिम पदोन्नति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है।न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने यह आदेश आरक्षक सुरेंद्र कुमार देशमुख द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।

वरिष्ठता सूची को लेकर उठाए गए सवाल

याचिका में पुलिस मुख्यालय द्वारा स्वयं के अनुरोध पर दूसरे जिलों में स्थानांतरण लेकर पहुंचे आरक्षकों की वरिष्ठता तय करने के तरीके को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियमों के अनुसार ऐसे आरक्षकों को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाना चाहिए।याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभाग उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता निर्धारित कर उन्हें पदोन्नति का लाभ देने की तैयारी कर रहा है। इससे उन आरक्षकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जो वर्षों से संबंधित जिले में कार्यरत हैं और नियमानुसार पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार वानखेड़े ने अदालत में कहा कि विभाग की प्रस्तावित कार्रवाई सेवा नियमों के विपरीत है। यदि स्थानांतरित आरक्षकों को पुरानी नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता दी जाती है तो लंबे समय से संबंधित जिले में कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।

शासन ने मांगा जवाब दाखिल करने का समय

राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को सीधे चुनौती नहीं दी है। उन्होंने अदालत से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक (भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2007 का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग पदोन्नति से जुड़ी प्रशासनिक और विभागीय प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक के संबंध में अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।

37 प्रतिवादियों को नोटिस जारी

अदालत ने प्रतिवादियों की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा नोटिस स्वीकार किए जाने के कारण उनके लिए प्रक्रिया शुल्क से छूट प्रदान की। वहीं, 37 अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।हाईकोर्ट ने इस याचिका को समान प्रकृति के एक अन्य मामले के साथ अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश भी दिया है।

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