



जगदलपुर। बस्तर के झीरम घाटी नक्सल हमले की सुनवाई पूरी होने के बाद एनआईए कोर्ट का फैसला सोमवार 31 अगस्त को आने की उम्मीद जताई जा रही थी। कोर्ट ने इसे चार दिन आगे बढ़ा दिया है। अब पांच सितंबर को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। झीरम घाटी नक्सल हत्याकांड में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई है।
शेष 10 आरोपियों की हत्याकांड में भूमिका को लेकर एनआईए कोर्ट का फैसला आना है। अभियोजन पक्ष ने एनआईए स्पेशल कोर्ट के कोर्ट के समक्ष 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए हैं।10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस हुई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। रिजर्व फॉर आर्डर के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि आज इस पर कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।

पढ़िए झीरम घाटी हमले के बारे में ?
वर्ष 2013 के नवंबर दिसंबर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। तब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार काबिज थी और डॉ रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस ने प्रदेशभर में परिवर्तन यात्रा प्रारंभ की थी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की अगुवाई में प्रदेशभर में परिवर्तन यात्रा का दौर चल रहा था। कांग्रेसी दिग्गज इस यात्रा के जरिए कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रहे थे।
25 मई की वह काली रात
25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई। रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे। उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैंदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा।
झीरम घाटी में किया हमला
नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।
महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां
शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं।
चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी। झीरम घाटी में हमले के दौरान IED ब्लास्ट से एक गाड़ी का हिस्सा उड़कर नदी में जा गिरा था। ये 12 साल बाद भी वहीं फंसा हुआ है।
