



सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में विद्यार्थियों के उल्टी-दस्त से बीमार होने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पोलमपल्ली स्थित पोटाकेबिन एवं आरएमएसए छात्रावास में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बाद कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। मामले में छात्रावास संचालन में लापरवाही पाए जाने पर अधीक्षिका पदमलता मौर्य को निलंबित कर दिया गया है, जबकि सहायक शिक्षक वैजयंती चंद्रा को नया प्रभार सौंपा गया है।
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन अलर्ट
पोलमपल्ली के पोटाकेबिन एवं आरएमएसए छात्रावास में बच्चों के उल्टी-दस्त से पीड़ित होने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग दोरनापाल की टीम ने 28 और 29 अगस्त को स्वास्थ्य शिविर लगाया। इस दौरान छात्रावास में रहने वाले बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

29 अगस्त को कलेक्टर अमित कुमार ने स्वयं संस्था का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रावास के संचालन और व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां सामने आईं। इसके बाद प्रशासन ने अधीक्षिका पदमलता मौर्य को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया और सहायक शिक्षक वैजयंती चंद्रा को छात्रावास का प्रभार सौंपा।
तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। वहीं, मामले में कोंटा के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच टीम को मामले की पूरी पड़ताल कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रावास में स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था दुरुस्त
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छात्रावास में तत्काल कई व्यवस्थाएं की गई हैं। परिसर में दो नए वाटर फिल्टर लगाए गए हैं और बच्चों को उबला हुआ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा पूरे परिसर को सैनिटाइज किया गया है।
नालियों और शौचालयों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है। पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिए पीएचई विभाग ने पानी के सैंपल लिए हैं, जबकि खाद्य विभाग ने भोजन के नमूने जांच के लिए एकत्र किए हैं। बच्चों के हाथ धोने और बर्तन साफ करने के लिए अलग-अलग स्थान भी निर्धारित किए गए हैं।
जिले के सभी छात्रावासों की होगी जांच
घटना के बाद प्रशासन ने जिले के सभी पोटाकेबिन और छात्रावासों की व्यवस्थाओं की जांच कराने का फैसला लिया है। इसके लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अधिकारियों को दो दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
गंजेनार छात्रावास की अधीक्षिका भी हटाई गई
इसी बीच सुकमा जिले के विकासखंड छिंदगढ़ स्थित शासकीय कन्या आश्रम/छात्रावास गंजेनार में भी लापरवाही का मामला सामने आया। आश्रम भवन का मरम्मत कार्य समय पर पूरा नहीं होने और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के बावजूद इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं देने पर प्रशासन ने अधीक्षिका जसबती मांझी को पद से हटा दिया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, सहायक शिक्षक आशाकली को नया प्रभार सौंपा गया है।
50 छात्राओं में सिर्फ 13 स्कूल पहुंच रही थीं
बीईओ छिंदगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, गंजेनार आश्रम में कुल 50 छात्राएं दर्ज हैं। इनमें से केवल 13 छात्राएं ही प्राथमिक शाला गंजेनार में पढ़ने पहुंच रही थीं, जबकि 37 छात्राएं अपने-अपने गांवों की स्थानीय प्राथमिक शालाओं में पढ़ाई कर रही थीं। दूर-दराज के गांवों से आने वाली छात्राओं में उरमापाल, भोपावाड़ा, मेखावाया, कुन्दनपाल, अन्दुमपाल, कोडरीपाल, चौपेल, पोन्दुम, किकिरपाल और तुमकापाल की छात्राएं शामिल हैं।
मरम्मत पूरी होने तक दूसरे छात्रावास में होगा संचालन
मामला सामने आने के बाद आश्रम भवन का मरम्मत कार्य पूरा होने तक इसका संचालन अस्थायी रूप से सुकमा स्थित मरकामपारा छात्रावास में स्थानांतरित कर दिया गया है। साथ ही नियमित निरीक्षण में लापरवाही बरतने के मामले में बीईओ छिंदगढ़ को भी शोकाज नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद साफ है कि छात्रावासों में बच्चों की स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता और पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं में लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जा रहा है।
