



बिलासपुर। हाईकोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर तीन लोगों से कथित तौर पर 16 लाख रुपये लेने के मामले में अदालत ने आरक्षक डोमन कुमार पाटिल को राहत नहीं दी है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं प्रथम फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय, बिलासपुर की न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
आरोपी आरक्षक सकरी बटालियन में पदस्थ था। अभियोजन के अनुसार, उसने हाईकोर्ट के अधिकारियों से अपनी पहचान होने का दावा करते हुए लोगों को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसके बदले रकम ली। अदालत ने मामले की गंभीरता, गवाहों के बयान दर्ज नहीं होने और प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

खुद को रजिस्ट्रार जनरल का गनमैन बताने का आरोप
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहम्मद शाबाज खान ने वर्ष 2023-24 में हाईकोर्ट में सहायक ग्रेड-3 पद के लिए आवेदन किया था। इसी दौरान सकरी बटालियन में आने-जाने के दौरान उसकी पहचान आरक्षक डोमन कुमार पाटिल से हुई। शिकायत के मुताबिक, डोमन ने हाईकोर्ट के बड़े अधिकारियों से अपनी पहचान होने की बात कही। आरोप है कि उसने खुद को रजिस्ट्रार जनरल का गनमैन बताते हुए शाबाज को हाईकोर्ट में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
नौकरी के नाम पर मांगे आठ लाख रुपये
अभियोजन के अनुसार, डोमन ने नौकरी लगवाने के बदले आठ लाख रुपये की मांग की और चार लाख रुपये एडवांस देने को कहा। शिकायतकर्ता की भाभी साजिया नाज के बैंक खाते से 2 अप्रैल 2024 को चार लाख रुपये और 9 अप्रैल को दो लाख रुपये डोमन के एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। बाद में परीक्षा के बावजूद नौकरी नहीं लगने पर शिकायतकर्ता ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय डोमन लगातार टालमटोल करता रहा।
दो अन्य लोगों से भी पांच-पांच लाख लेने का आरोप
जांच के दौरान दो अन्य लोगों के आरोप भी सामने आए। मनीष कौशिक और विकास कुमार कौशिक ने आरोप लगाया कि उनसे भी हाईकोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपये लिए गए थे। इस तरह तीन लोगों से कुल 16 लाख रुपये लेने का आरोप आरक्षक डोमन कुमार पाटिल पर लगाया गया है।
7 अगस्त 2026 को हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले में पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी डोमन कुमार पाटिल को 7 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया और अदालत में चालान पेश किया। जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की परिस्थितियों और साक्षियों के बयान अभी दर्ज नहीं होने समेत अन्य तथ्यों को ध्यान में रखा। इन आधारों पर न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी।
