मगरमच्छ का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में नदी, झील या दलदल के किनारे छिपा एक खतरनाक शिकारी घूमने लगता है. उसकी मजबूत पकड़, नुकीले दांत और पानी में तेजी देखकर अच्छे-अच्छों की हालत खराब हो जाती है. इंसान तो दूर, कई जानवर भी मगरमच्छ से बचकर निकलना चाहते हैं.

ऐसे में जरा सोचिए, अगर कोई आपको बताए कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां लोग मगरमच्छ से डरने के बजाय उसका मांस खाते हैं, उसकी चमड़ी से महंगे सामान बनाते हैं और यहां तक कि खून और पित्त भी बेचते हैं, तो शायद आपको यकीन करना मुश्किल होगा.लेकिन आज हम जिस देश के बारे में बताने जा रहे हैं, वहां मगरमच्छ पालन एक बड़ा कारोबार है और इससे जुड़ी पूरी इंडस्ट्री काम करती है.


दरअसल, जिस देश के बारे में हम बात कर रहे हैं, उसका नाम थाईलैंड है. यहां मगरमच्छ फार्म लंबे समय से मौजूद हैं और यहां इन जानवरों को बड़े पैमाने पर पाला जाता है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में 1000 से ज्यादा फार्मों में करीब 12 लाख मगरमच्छ पाले जाते हैं. इन फार्मों में मगरमच्छों को पालने से लेकर उनकी प्रोसेसिंग और उनसे बनने वाले सामान तक का पूरा कारोबार चलता है. कुछ बड़े फार्मों में हजारों नहीं बल्कि लाखों मगरमच्छ रखे जाते हैं. कई फार्म अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत रजिस्टर्ड भी हैं.

मगरमच्छ का मांस भी बिकता है

जिस जानवर को देखकर आम इंसान अपनी जान बचाने के लिए भाग खड़ा हो, उसी मगरमच्छ का मांस थाईलैंड में बाजार का हिस्सा है. यहां इसके मांस को खाया जाता है और कई जगहों पर इसकी बिक्री भी होती है. मगरमच्छ के मांस की कीमत करीब 570 रुपये प्रति किलो बताई जाती है. इसका स्वाद कुछ लोगों को चिकन जैसा लगता है.

इसमें वसा (Fat) कम और प्रोटीन ज्यादा होने की वजह से भी इसे खाने वाले लोग इसे पसंद करते हैं. साल 2022 में जब सूअर के मांस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, तब मगरमच्छ के मांस की मांग में भी काफी इजाफा हुआ था. रिपोर्टों के मुताबिक, उस दौरान इसकी मांग करीब 70 फीसदी तक बढ़ी.

खून और पित्त की भी होती है बिक्री

मगरमच्छ से जुड़ी सबसे हैरान करने वाली बात सिर्फ उसका मांस नहीं है. यहां उसके खून और पित्त का भी कारोबार होता है. कुछ पारंपरिक दवाओं और उत्पादों में इनके इस्तेमाल का दावा किया जाता है. बताया जाता है कि मगरमच्छ का खून करीब 1000 रुपये प्रति किलो और पित्त करीब 76 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है. हालांकि, इनके औषधीय फायदे को लेकर किए जाने वाले कई दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. इसलिए इन्हें किसी बीमारी के इलाज के तौर पर मानना सही नहीं होगा.

चमड़े से बनते हैं महंगे बैग और सूट

मगरमच्छ की चमड़ी इस पूरे कारोबार का सबसे महंगा हिस्सा मानी जाती है. इसकी चमड़ी से बैग, बेल्ट, जैकेट, जूते और दूसरे लक्जरी सामान बनाए जाते हैं. कुछ मगरमच्छ की चमड़ी से बने बैग की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये तक बताई जाती है, जबकि लेदर सूट की कीमत कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है. थाईलैंड से ऐसे उत्पाद चीन, जापान और फ्रांस समेत कई देशों में भेजे जाते हैं.

यानी एक मगरमच्छ से मांस और चमड़ी के अलावा कई दूसरे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, जिससे यह सिर्फ पशुपालन नहीं बल्कि एक बड़ा व्यावसायिक सेक्टर बन गया है.थाईलैंड आने वाले पर्यटकों के लिए भी मगरमच्छ फार्म आकर्षण का केंद्र हैं. कई जगह पर्यटक मगरमच्छों को खाना खिलाते हैं, उनके शो देखते हैं और मगरमच्छ की चमड़ी से बने सामान भी खरीदते हैं.

जिंदा मगरमच्छ काटने पर उठते हैं सवाल

मगरमच्छ फार्मिंग से जुड़ा सबसे विवादित मुद्दा इन्हें मारने और काटने का तरीका है. पशु अधिकार संगठनों ने कुछ फार्मों में मगरमच्छों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे क्रूर बताया है. यही वजह है कि मगरमच्छ पालन को लेकर थाईलैंड में आर्थिक फायदे के साथ-साथ नैतिक सवाल भी खड़े होते रहे हैं. दूसरी तरफ, फार्म चालक का तर्क है कि यह एक कानूनी और नियंत्रित उद्योग है.

सायामी मगरमच्छ के संरक्षण की भी चुनौती

थाईलैंड में सायामी मगरमच्छ भी पाए जाते हैं. यह प्रजाति जंगली इलाकों में गंभीर रूप से संकटग्रस्त मानी जाती है. जंगलों में इनकी संख्या बेहद कम रह गई है, जबकि फार्मों में इनकी बड़ी संख्या मौजूद है. हालांकि, फार्मों में पाले जाने वाले मगरमच्छों और जंगली आबादी के बीच जेनेटिक शुद्धता को लेकर भी चिंता जताई जाती है. कुछ संरक्षण परियोजनाओं के तहत सायामी मगरमच्छों को दोबारा प्राकृतिक इलाकों में छोड़ने की कोशिश की जा रही है.

कारोबार और संरक्षण के बीच फंसा मगरमच्छ उद्योग

थाईलैंड का मगरमच्छ उद्योग जितना बड़ा है, उससे जुड़े सवाल भी उतने ही गंभीर हैं. एक तरफ इससे किसानों, कारोबारियों और पर्यटन क्षेत्र को कमाई होती है, तो दूसरी तरफ पशु कल्याण और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की चिंता बनी रहती है. यानी जिस मगरमच्छ को देखकर दुनिया के कई हिस्सों में लोग डरकर रास्ता बदल लेते हैं, थाईलैंड में वही एक बड़े कारोबार का हिस्सा है.

यहां उसका मांस खाने से लेकर चमड़े से महंगे सामान बनाने तक, पूरी इंडस्ट्री खड़ी है. हालांकि, इस कारोबार के साथ जुड़े दावों और मगरमच्छों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर अलग-अलग मत हैं. इसलिए इसे सिर्फ हैरान करने वाली कहानी के तौर पर नहीं, बल्कि कारोबार, पशु कल्याण और संरक्षण तीनों पहलुओं के साथ देखना ज्यादा सही होगा.

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