



भिलाई। गलतियां एक-दो बार हो सकती हैं, लेकिन जब एक ही तरह की गलतियां बार-बार दोहराई जाएं तो उसे महज गलती नहीं कहा जा सकता। यह जानबूझकर अपनाई गई नीति और निर्णय का हिस्सा माना जाएगा। सेल एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के वेतन समझौते को लेकर सीटू ने कुछ यूनियनों के पिछले निर्णयों और बदलते रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजदूरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर बार-बार समझौते किए गए और अब उन निर्णयों के परिणाम सामने आने पर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है।
39 महीने के एरियर्स के बिना दसवां वेतन समझौता अधूरा
सीटू ने दो टूक कहा है कि पिछले नौ वेतन समझौते में कभी भी एरियर्स नहीं रोका गया है और बेसिक तथा महंगाई भत्ता का अंतर अर्थात एरियर्स हमारा हक है। अतः 39 महीने के एरियर्स का समाधान किए बिना दसवां वेतन समझौता पूरा नहीं हो सकता।

कर्मचारियों ने वर्षों तक अपने हक के भुगतान का इंतजार किया है। इसलिए एरियर्स के मुद्दे को वेतन समझौते से अलग करके देखने का कोई औचित्य नहीं है। सीटू का स्पष्ट मत है कि मजदूरों के लंबित हक का समाधान किए बिना किसी भी वेतन समझौते को पूर्ण नहीं माना जा सकता।
बहुमत के नाम पर लिए फैसलों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सीटू ने आरोप लगाया कि बहुमत के नाम पर बार-बार मजदूरों के हितों के साथ खिलवाड़ किया गया। मिनिमम गारंटीड बेनिफिट तय करने में बहुमत, पर्क्स तय करने में बहुमत, बोनस फार्मूला बनाने में बहुमत, नाइट शिफ्ट अलाउंस के बदले बायोमेट्रिक की शर्त स्वीकार करने में बहुमत और अंततः वेतन समझौते की अवधि को पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने में भी बहुमत का सहारा लिया गया। सीटू का सवाल है कि जब इन फैसलों के दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं तो आखिर इन निर्णयों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
पाला बदलते ही बदल गई बयानबाजी, पुरानी भूमिका की जवाबदेही जरूरी
सीटू ने सवाल उठाया कि जो लोग पहले दूसरे यूनियन में रहते हुए एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाने का पुरजोर समर्थन कर रहे थे, वही आज पाला बदलकर दूसरे यूनियन में जाते ही हस्ताक्षर करने वाली यूनियनों पर कटाक्ष करते नजर आ रहे हैं। सीटू के अनुसार, मजदूरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सुविधा के अनुसार रुख बदलने के बजाय अपनी पुरानी भूमिका और निर्णयों की जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
एनजेसीएस बैठक में जिन प्रावधानों और शर्तों को सीटू ने मजदूर हितों के खिलाफ माना, उन पर उस समय भी आपत्ति दर्ज की थी और हस्ताक्षर नहीं किए थे। आज भी सीटू अपने उस रुख पर कायम है।
गलतियों पर आरोप-प्रत्यारोप नहीं, एकजुट संघर्ष से ही बदलेगी स्थिति
सीटू का कहना है कि अब धीरे-धीरे अन्य यूनियनों को भी महसूस हो रहा है कि पहले के समझौतों में गंभीर कमियां रह गई हैं। ऐसे में एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय उन गलतियों को सुधारने के लिए संयुक्त रूप से उचित कदम उठाने की जरूरत है।
प्रबंधन अपनी मनमानी तभी बंद करेगा, जब मजदूरों की एकजुट ताकत और संघर्ष उसे मजबूर करेगी। इसलिए 39 महीने के एरियर्स, बेहतर वेतन समझौते और मजदूरों के अधिकारों से जुड़े तमाम मुद्दों को लेकर स्वतंत्र एवं संयुक्त संघर्ष को और तेज करना ही आज का रास्ता है। सीटू इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है और मजदूरों के हक की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं है।
