
भिलाई: दुर्ग जिले के नंदिनी थाना अंतर्गत ग्राम बासिन में पुलिस और खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध गुटखा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यहां ‘मुसाफिर’ और ‘M4’ जैसे नामी ब्रांडों के नाम पर जर्दा युक्त गुटखे का अवैध उत्पादन धड़ल्ले से किया जा रहा था।
फैक्ट्री में काम करते मिले 3 राज्यों के 13 मजदूर
छापेमारी के दौरान मौके पर 13 मजदूर काम करते पाए गए, जो मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के रहने वाले हैं। पुलिस इन मजदूरों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है ताकि फैक्ट्री के असली संचालक और इस सिंडिकेट के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

भारी मात्रा में कच्चा माल और मशीनें जब्त
प्रशासन ने मौके से भारी मात्रा में:


- तैयार गुटखा और सुगंधित जर्दा
- पैकिंग सामग्री और रैपर
- अत्याधुनिक मशीनरी और कच्चा माल जब्त किया है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह अवैध यूनिट अप्रैल की शुरुआत से ही सक्रिय थी और यहां से बड़े पैमाने पर सप्लाई की जा रही थी।
‘रजत सेल्स’ के लाइसेंस नंबर से जुड़े तार
मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा लाइसेंस को लेकर हुआ है। जिला खाद्य और औषधि प्रशासन अधिकारी जितेन्द्र नेने ने बताया कि जब्त किए गए ‘मुसाफिर’ ब्रांड के पैकेट पर कुम्हारी स्थित ‘रजत सेल्स’ का लाइसेंस नंबर छपा मिला है।
जांच के दो मुख्य बिंदु:
- क्या यह ‘रजत सेल्स’ की ही बिना लाइसेंस वाली दूसरी यूनिट है?
- या फिर ब्रांड के नाम का इस्तेमाल कर नकली (डुप्लीकेट) गुटखा बनाया जा रहा था?
फरार मालिक पर गिरेगी गाज
फिलहाल फैक्ट्री का मालिक फरार है। अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई इस यूनिट पर दावा नहीं करता है, तो मकान मालिक की भूमिका और मजदूरों के बयान के आधार पर कड़ी धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। साथ ही, गुटखे के सैंपल लैब भेजे गए हैं; रिपोर्ट में मिलावट पाए जाने पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत अलग से कार्रवाई होगी।
“यदि यह डुप्लीकेट ब्रांडिंग का मामला निकला, तो धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। हम फिलहाल मालिक के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।” — जितेन्द्र नेने, जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन अधिकारी
