
रायपुर। रायपुर वन मंडल के अंतर्गत कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
नाराज कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जानकारी के अनुसार रायपुर वन मंडल के अंतर्गत सोन डोंगरी, नया रायपुर, अभनपुर डिपो, गोढ़ी, सीएसओ, एसएसओ, तिल्दा, नंदनवन और जोरा नर्सरी सहित विभिन्न प्लांटेशन और वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत हैं।

ये कर्मचारी पौधरोपण, नर्सरी देखरेख, वन संरक्षण और रखरखाव जैसे कार्यों में लगे हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों और तेज धूप में लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में कार्यालय और बंगले में कार्य करने वाले कर्मचारियों को हर महीने की 5 तारीख तक वेतन मिल जाता है, जबकि फील्ड और गार्डन में काम करने वाले कर्मचारियों को 20 तारीख के बाद भुगतान किया जाता है।


कई बार तो महीने खत्म होने के बाद भी वेतन नहीं मिल पाता। इससे कर्मचारियों के परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाने तक की समस्या खड़ी हो रही है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से कार्यरत होने के बावजूद उन्हें शासन की ओर से मिलने वाली 4000 रुपये की श्रम सम्मान राशि का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं और अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को बच्चों की पढ़ाई, राशन, इलाज और अन्य घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का वेतन समय पर जारी किया जाए और श्रम सम्मान राशि का लाभ भी दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो सभी कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभागीय प्रशासन की होगी।
