
अंबिकापुर| अंबिकापुर शहर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर संरक्षित वन भूमि पर बीते 10 साल से अवैध कब्जा और जमीन हथियाने का गोरखधंधा चल रहा था। कांग्रेस शासनकाल में स्थानीय नेताओं और सरकार के सीधे हस्तक्षेप के चलते वन भूमि वह भी संरक्षित वन भूमि पर कब्जे के खेल ने जोर पकड़ा। भाजपा के वरिष्ठ नेता व नगर निगम के पार्षद आलोक दुबे ने सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले की गंभीरता और रिजर्व फारेस्ट एरिया में बंगलादेशी मुसलमानों के कब्जे को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को निर्देश जारी किया था। सीएम के राजधानी लौटने के तीन दिनों के भीतर रिजर्व फारेस्ट एरिया को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई शुक्रवार सुबह से शुरू हो गई है।

मौके पर सुबह से एसडीएम, तहसीलदार, डीएफओ सरगुजा व एसडीओ फारेस्ट की मौजूदगी में बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई। विवाद की स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की गई है। संरक्षित वन भूमि पर कब्जे कर बनाए गए पक्के मकान को एक्सीवेटर के जरिए ढहाने का काम किया जा रहा है।


200 एकड़ जमीन पर कब्जा, खेती बाड़ी भी कर रहे
बंगलादेश से आए मुसलमानों ने अंबिकापुर शहर से लगे रिजर्व फारेस्ट एरिया के तकरीबन 200 एकड़ जमीन पर कब्जा कर पक्का मकान बनाने के अलावा जंगल की जमीन पर खेती बाड़ी भी करने लगे थे।
अचरज की बात ये, शहर के महज पांच किलोमीटर की दूरी पर महामाया पहाड़ के संरक्षित वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 2581 एवं 2582 के डबरी पानी घुटरापारा एवं नवागढ़ में वन क्षेत्र में कब्जा का खेल चलते रहा और स्थानीय प्रशासन के अलावा वन विभाग के अफसर आंख मूंद कर बैठे रहे। परिवार के परिवार बंगलादेश से आकर बसने लगे, पक्का व कच्चा मकान बनाने के अलावा वन भूमि पर खेती बाड़ी भी करने लगे, इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
भाजपा नेता व पार्षद आलोक दुबे ने सीएम से की थी लिखित शिकायत
भाजपा नेता व नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने रिजर्व फारेस्ट एरिया में बंगलादेश व बिहार के मुसलमानों द्वारा कब्जा करने की शिकायत करते हुए बेदखल करने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। सीएम को लिखे पत्र में पार्षद दुबे ने रिजर्व फारेस्ट एरिया में कब्जा करने वालों की सूची भी जारीर की थी।
पढ़िए पार्षद दुबे ने सीएम को पत्र में क्या लिखा है
अम्बिकापुर नगर निगम सीमा से लगे महामाया पहाड़ जो संरक्षित वन क्षेत्र में आता है। एवं इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरवार एवं बधिया चुंवा के वन संरक्षित क्षेत्र कक्ष कमांक 2581,2582 के डबरी पानी में वर्तमान वन मंडलाधिकारी श्री अभिषेक जोगावत द्वारा मार्च 2026 को कक्ष कमांक 2581 में दिनाँक 12.03. 2026 को 43 व्यक्तियों को वन अधिनियम की धारा 80 (ए) के तहत अंतिम बेदखली नोटिस जारी किया गया।
इसी प्रकार 114 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी किया गया। इसकी 15 दिन की अवधि 27.मार्च 2026 को समाप्त हो गई इसके बाद भी वन मंडलाधिकारी सरगुजा अभिषेक जोगावत द्वारा इनके अतिक्रमण को हटाने के लिये कोई भी प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है।
मार्च 2026 में अतिक्रमण हटाने के दौरान डीएफओ. सरगुजा द्वारा न तो कलेक्टर सरगुजा न तो पुलिस अधिक्षक से अतिक्रमण हटाने के समय कार्यपालक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल की मांग की गई। यह डीएफओ. सरगुजा के घोर लापरवाही का परिचायक है। इस बीच अंतिम बेदखली के समय 28 मार्च 2026 को समाप्त होने के बाद, डबरी पानी के 9 और नवागढ़ के 9 निवासरत 18 लोगों ने हाई कोर्ट बिलासपुर से स्थगन प्राप्त कर लिया।
पार्षद आलोक दुबे ने से सीएम से मांग करते हुए लिखा, इस क्षेत्र मे जो 157 लोगों को जो नोटिस दी गई है। उसमें अधिकांश बाहरी प्रांत के अल्पसंख्यक मुसलमान हैं। जो पता नहीं किस राज्य से कहां से आकर और बिना पुलिस वेरिफिकेशन के रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध रुप से कब्जा कर रह रहे हैं।
संपूर्ण वन आरक्षित क्षेत्र मे हरे भरे जंगल को काटकर अवैध रुप से रह रहे लोगों को बेदखल नहीं करने के कारण डीएफओ. अभिषेक जोगावत को तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की अनुशंसा करें। साथ ही सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत के नेतृत्व में एवं पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल को निर्देशित कर पुलिस बल की सहायता से तत्काल वन क्षेत्र डबरी पानी घुटरापारा एवं नवागढ़ में वन क्षेत्र मे हुये अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दें।
