दुनिया का सबसे सूखा देश! ना बहती है कोई नदी, ना है कोई झील, फिर कैसे बुझाता है लाखों लोगों की प्यास?

कुवैत का नाम दुनिया के सबसे सूखे देशों की लिस्ट में शामिल है. ये एक ऐसा देश है, जहां कोई नदी नहीं बहती. ना ही कोई प्राकृतिक झील है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ये देश अपनी लाखों की जनसंख्या की प्यास कैसे बुझाता है?

कुवैत एक ऐसा देश है, जहां रेगिस्तान की गर्मी और सूखा हर तरफ फैला है. दुनिया के सबसे ज्यादा पानी के कमी वाले (water-stressed) देशों में टॉप पर है कुवैत. यहां कोई स्थायी नदी नहीं बहती और कोई प्राकृतिक झील नहीं है.

इसके अलावा इस देश में सालाना औसत बारिश सिर्फ 110-130 mm होती है (ज्यादातर अक्टूबर से अप्रैल के बीच, वो भी अनियमित). गर्मी की वजह से उच्च वाष्पीकरण दर (3000 mm से ज्यादा) है. इसके कारण बारिश का पानी जमीन में रिचार्ज नहीं हो पाता. फिर भी यहां की आबादी 50 लाख से ज्यादा है, और हर व्यक्ति की रोजाना पानी की जरूरत पूरी होती है. आखिर कैसे?

कैसे बुझती है लोगों की प्यास?

सूखे देश में रहने वाले लोगों की प्यास कैसे बुझती है, इसका जवाब है– सीवॉटर डिसेलिनेशन (समुद्री पानी से नमक निकालकर मीठा पानी बनाना). कुवैत दुनिया का पहला देश था जिसने 1951 में बड़े स्केल पर डिसेलिनेशन शुरू किया था. आज 90% से ज्यादा पीने का पानी और घरेलू इस्तेमाल का पानी अरबियन गल्फ से पंप किए गए समुद्री पानी से बनता है.

देश में सात से ज्यादा बड़े डिसेलिनेशन प्लांट्स हैं, जैसे Az Zour North & South, Shuaiba, Doha East & West, Subiya, जिसकी कुल कैपेसिटी 2.4 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति दिन से ज्यादा है. ये प्लांट्स मल्टी-स्टेज फ्लैश (MSF) और रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) टेक्नोलॉजी से काम करते हैं. ‘

कुवैत में कोई नेचुरल फ्रेशवाटर नहीं होने से ग्राउंडवाटर भी ब्रैकिश (खारा) है और सीमित है. इसलिए डिसेलिनेशन ही मुख्य स्रोत है. 92% घरेलू और इंडस्ट्रियल पानी इसी से आता है. बाकी वेस्टवाटर ट्रीटमेंट और रीयूज से (जैसे Sulaibiya प्लांट, दुनिया का सबसे बड़ा मेम्ब्रेन-बेस्ड वाटर रीयूज प्लांट) से आता है.

बढ़ रहे हैं प्लांट्स की संख्या

हाल के सालों में Umm Al-Hayman जैसे नए प्लांट्स ने वेस्टवाटर को एग्रीकल्चर और इंडस्ट्री के लिए रीयूज बढ़ाया है. 2024-2025 में नॉर्थ काब्द प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स से कैपेसिटी 1 मिलियन क्यूबिक मीटर/दिन तक बढ़ रही है. लेकिन ये आसान नहीं है. डिसेलिनेशन बहुत महंगा और एनर्जी-इंटेंसिव है. कुवैत की तेल की दौलत से सब्सिडी मिलती है.

प्रति व्यक्ति पानी की खपत बहुत ज्यादा (447 लीटर/दिन) है जो ग्लोबल एवरेज से कहीं ज्यादा है. क्लाइमेट चेंज से बारिश और कम हो रही है और पॉपुलेशन बढ़ रही है. इसलिए कुवैत सस्टेनेबल सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है. अब वो सोलर-पावर्ड डिसेलिनेशन, एडवांस्ड RO सिस्टम्स और वाटर कंजर्वेशन का इस्तेमाल कर रहा है.

कुवैत की फेमस वॉटर टावर्स (Kuwait Towers) भी पानी स्टोरेज का सिंबल हैं. ये नीले गोलाकार टावर्स शहर की पहचान बन चुके हैं. ये दिखाते हैं कि कैसे टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग ने एक सूखे देश को पानी से भरपूर बनाया है.

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