Unknown Facts: ना अफ्रीका के जंगल, ना ही अमेजन सिर्फ भारत के हिमालय में 5 अजीबोगरीब जीव मिलते हैं. जिनके नाम लोगों को शायद ही पता होगा.
स्नो लेपर्ड
स्नो लेपर्ड को पहाड़ों का भूत कहा जाता है और यह हिमालय का सबसे मशहूर शिकारी जानवर माना जाता है. बर्फीले और कठिन इलाकों में रहने के लिए इसकी मोटी फर, बड़े पंजे और लंबी पूंछ इसे खास बनाती है. स्नो लेपर्ड मुख्य रूप से लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं. ये स्वभाव से अकेले रहने वाले जानवर होते हैं और बहुत ही कम नजर आते हैं.
मोनाल
हिमालयन मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी है और इसे दुनिया के सबसे सुंदर पक्षियों में गिना जाता है. इसके पंखों में हरे, नीले, तांबे और सुनहरे रंगों की चमक होती है, जो पहाड़ी जंगलों में बेहद आकर्षक लगती है. यह पक्षी आमतौर पर 2,400 से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर ओक, देवदार और रोडोडेंड्रॉन के जंगलों में पाया जाता है.
रेड पांडा
रेड पांडा न तो भालू है और न ही जायंट पांडा का नजदीकी रिश्तेदार. यह एक छोटा, पेड़ों पर रहने वाला स्तनधारी जीव है, जो खास तौर पर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के ठंडे और बांस से भरे जंगलों में रहता है. इसकी लाल-भूरी फर और घनी, झबरीली पूंछ इसे अलग पहचान देती है. रेड पांडा बेहद शर्मीला होता है और अधिकतर रात के समय सक्रिय रहता है.
हिमालयन ताहर
हिमालयन ताहर एक ताकतवर पहाड़ी जानवर है, जो खड़ी और पथरीली ढलानों पर आसानी से चलने की क्षमता रखता है. इसके शरीर पर घनी फर होती है, जबकि नर ताहर की मोटी अयाल इसकी खास पहचान है. यह उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले घास के मैदानों और चट्टानी क्षेत्रों में पाया जाता है और अक्सर झुंड में नजर आता है.
मस्क डियर
हिमालयन मस्क डियर एक शांत और कम दिखाई देने वाला जीव है, जो घने अल्पाइन जंगलों और झाड़ियों वाले इलाकों में रहता है. नर मस्क डियर में पाई जाने वाली मस्क ग्रंथि इसे खास बनाती है, जिसका उपयोग लंबे समय से इत्र बनाने में किया जाता रहा है. अन्य हिरणों के अलावा, इनमें सींग नहीं होते, बल्कि नुकीले दांत पाए जाते हैं.