जापान के बयान से भड़का चीन, वांग यी ने की कड़ी आलोचना
ताइवान मुद्दे पर जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची के हालिया बयान ने चीन को नाराज़ कर दिया है। ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान पर नौसैनिक नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह जापान के जवाबी सैन्य हस्तक्षेप का आधार बन सकता है।
इस पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जापान ने ऐसी बातें कहीं हैं “जो उन्हें नहीं कहनी चाहिए थीं” और इससे उन्होंने “एक ऐसी सीमा लांघ दी है, जहां तक उन्हें जाना ही नहीं चाहिए था।”
चीन बोले—जापान की हरकतों का जवाब देना ज़रूरी
चीन के विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बयान जारी कर कहा:
“जापान का यह बयान स्तब्ध करने वाला है और ताइवान मामले में गलत और खतरनाक संकेत देता है। चीन को इसका दृढ़ता से जवाब देना चाहिए।”
ताकाइची के बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। बीजिंग ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र भेजकर जापानी प्रधानमंत्री पर अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
शी जिनपिंग ने भी दिया था सख्त संदेश
हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान पर अपना रुख दोहराते हुए कहा था:
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ताइवान की स्वतंत्रता वाले किसी भी आंदोलन का कड़ा विरोध किया जाएगा
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बाहरी देशों द्वारा हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
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चीन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगा
यह बयान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की 76वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया था।
1949 से अब तक: चीन–ताइवान विवाद का इतिहास
चीन और ताइवान का विभाजन 1949 के गृहयुद्ध के बाद हुआ था।
हारने के बाद नेशनलिस्ट पार्टी (कुओमिनतांग) की सेना ताइवान चली गई और वहां उन्होंने नई सरकार बना ली।
तब से:
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चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है
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ताइवान खुद को लोकतांत्रिक और स्वशासित क्षेत्र बताता है
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चीनी सेना ताइवान के समुद्री और हवाई क्षेत्र में नियमित रूप से युद्धपोत और लड़ाकू विमान भेजती रहती है
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हाल के वर्षों में चीन ने कई बड़े सैन्य अभ्यास भी किए हैं