Child Sexual Abuse Case: 9 साल की बच्ची मिली प्रेग्नेंट, जांच में आरोपी निकला 11 साल का सगा भाई; महिला अधिकारी ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना

नई दिल्ली | चाइल्ड सेफ्टी न्यूज़

भारत में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज, सिस्टम और परिवार—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला अधिकारी ने हाल ही में एक केस का खुलासा किया, जिसमें 9 साल की बच्ची आठ महीने की गर्भवती पाई गई, जबकि जांच में आरोपी उसका 11 साल का सगा भाई निकला।

क्यों यह मामला पूरे सिस्टम के लिए अलार्म है?

महिला अधिकारी के अनुसार, बच्ची की गर्भावस्था आठवें महीने तक पहुंच चुकी थी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि परिवार के किसी सदस्य—यहां तक कि मां को भी इसका अंदाजा नहीं हुआ
यह सिर्फ एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं, बल्कि घरेलू निगरानी, जागरूकता और सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

पुलिस तक पहुंचने के बाद क्या हुआ?

अधिकारी ने बताया कि मामला सामने आते ही बच्ची को काउंसलिंग और मेडिकल ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया गया। जांच प्रक्रिया शुरू की गई और पूरे केस को संवेदनशीलता के साथ हैंडल किया गया।
उन्होंने कहा कि कई बार शर्म, डर और सामाजिक दबाव के चलते परिवार चुप रह जाता है, जिससे पीड़ित बच्चा भावनात्मक रूप से पूरी तरह अकेला पड़ जाता है

9 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी कितनी खतरनाक?

डॉक्टर्स के मुताबिक इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जानलेवा तक साबित हो सकती है। इसके गंभीर खतरे हैं—

  • शरीर का पूरी तरह विकसित न होना

  • अत्यधिक खून की कमी (एनीमिया)

  • संक्रमण और जटिल सर्जरी का जोखिम

  • गहरा मानसिक आघात

  • भविष्य के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर

POCSO कानून ऐसे मामलों में क्या कहता है?

भारत में बच्चों के यौन शोषण से सुरक्षा के लिए POCSO Act लागू है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का यौन अपराध गंभीर अपराध माना जाता है।
हालांकि इस केस में आरोपी भी नाबालिग है, इसलिए मामला आमतौर पर Juvenile Justice Act के अंतर्गत आता है, जहां सजा से ज्यादा सुधार (Reformation) और काउंसलिंग पर जोर दिया जाता है।

घर ही क्यों बन रहा है बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित जगह?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कई मामलों में खतरा बाहर नहीं, घर के अंदर होता है। इसलिए ज़रूरी है—

  • बच्चों को Good Touch–Bad Touch की जानकारी देना

  • उनके व्यवहार में बदलाव, डर या चुप्पी को गंभीरता से लेना

  • शरीर में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज न करना

  • बच्चों को भरोसा दिलाना कि सच बताने पर डांट या सजा नहीं मिलेगी

शक होने पर कहां लें तुरंत मदद?

चुप रहना सबसे बड़ा अपराध हो सकता है। मदद के लिए तुरंत संपर्क करें—

  • Childline: 1098

  • Women Helpline: 181

  • नजदीकी पुलिस स्टेशन / महिला थाना

  • स्कूल काउंसलर या भरोसेमंद डॉक्टर

सबक क्या है?

यह मामला एक कड़ी चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कानून या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसकी शुरुआत पैरेंट्स की सतर्कता, संवाद और भरोसे से होती है।
अगर बच्चा सुरक्षित नहीं बोलेगा, तो सिस्टम भी देर से जागेगा।

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