दुनिया भर में जहां लोग चमकदार सफेद दांतों को सुंदरता की निशानी मानते हैं, वहीं चीन के युन्नान प्रांत में रहने वाली बुलांग जनजाति (Bulang Tribe) में काले दांत सौंदर्य, शक्ति और परिपक्वता का प्रतीक माने जाते हैं। इस समुदाय में किशोरावस्था में प्रवेश करते ही युवाओं के दांत काले करने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कई गांवों में निभाई जाती है।
कौन है बुलांग जनजाति?
बुलांग जनजाति चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, खासकर युन्नान प्रांत के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में निवास करती है। इस समुदाय का इतिहास लगभग एक हजार साल से अधिक पुराना माना जाता है। ये लोग अपनी विशिष्ट वेशभूषा, टैटू परंपरा और अनूठे सामाजिक रीति-रिवाजों के लिए जाने जाते हैं।
क्यों काले किए जाते हैं दांत?
बुलांग समुदाय में सफेद दांतों को इंसानों की नहीं बल्कि जानवरों और दुष्ट शक्तियों की पहचान माना जाता है।
मान्यताओं के अनुसार:
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काला रंग शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है
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काले दांत व्यक्ति को बुरी शक्तियों और आपदाओं से बचाते हैं
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यह वयस्क होने का सामाजिक प्रमाण है
क्या है ‘रांची’ रस्म?
दांत काले करने की इस पारंपरिक प्रक्रिया को स्थानीय भाषा में ‘रांची’ कहा जाता है। यह सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि वयस्कता में प्रवेश का संस्कार है।
रांची प्रक्रिया के मुख्य चरण:
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पहले दांतों पर खट्टे फलों का रस लगाया जाता है
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इससे दांतों की ऊपरी परत तैयार होती है
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फिर जलती लकड़ी या राल (resin) के गाढ़े काले धुएं से दांत रंगे जाते हैं
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प्रक्रिया में कई बार युवक-युवतियां एक-दूसरे की मदद करते हैं
रस्म के बाद मिलते हैं सामाजिक अधिकार
रांची संस्कार पूरा करने के बाद ही युवक-युवती को समुदाय में पूर्ण सदस्य माना जाता है। इसके बाद ही उन्हें:
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विवाह की अनुमति
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सामाजिक निर्णयों में भागीदारी
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पारंपरिक जिम्मेदारियां
दी जाती हैं।
लड़कों को कुल्हाड़ी, झोला और कंबल, जबकि लड़कियों को नए कपड़े और बांस की टोकरी भेंट की जाती है।
दांत मजबूत रहने की भी मान्यता
समुदाय का यह भी विश्वास है कि इस प्राकृतिक विधि से दांत काले करने पर वे अधिक मजबूत रहते हैं और बुढ़ापे तक सुरक्षित रहते हैं।
अन्य देशों में भी रही ऐसी परंपरा
दांत काले करने की परंपरा केवल बुलांग जनजाति तक सीमित नहीं रही।
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जापान के सामंती काल में
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वियतनाम के कुछ क्षेत्रों में
भी इसे उच्च दर्जा और वफादारी का प्रतीक माना जाता था।
बुलांग जनजाति की अन्य खास परंपराएं
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महिलाएं बड़े और भारी झुमके पहनती हैं — सामाजिक स्थिति का प्रतीक
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पुरुषों के लिए टैटू बनवाना जरूरी माना जाता है
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बिना टैटू वाले पुरुष को कमजोर समझा जाता है
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शादी तीन चरणों में पूरी होती है