वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश खुलकर ईरान के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। इसी बीच व्हाइट हाउस के भीतर भी ईरान को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की राय अलग-अलग है। जहां ट्रंप कठोर रुख अपनाने के पक्ष में हैं, वहीं वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो पहले कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की सलाह दे रहे हैं।
डिप्लोमैसी बनाम मिलिट्री एक्शन: व्हाइट हाउस में दो राय
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारियों में जुटे हैं। वहीं जेडी वेंस और विदेश मंत्री का मानना है कि युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी मिलिट्री एक्शन से पहले डिप्लोमैटिक विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
ईरान के साथ सभी बैठकें रद्द, प्रदर्शनकारियों को समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के ज़रिए ईरान की जनता से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था, लेकिन अब अमेरिका ने ईरान के साथ सभी आधिकारिक बैठकें रद्द कर दी हैं।
इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि ट्रंप अपने करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ को बैक-चैनल बातचीत के लिए ईरान भेज सकते हैं।
यूरोप भी ईरान के खिलाफ लामबंद
ईरान में जारी प्रदर्शनों के समर्थन में कई यूरोपीय देश खुलकर सामने आ गए हैं।
फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने ईरान के साथ अपने डिप्लोमैटिक रिश्तों को डाउनग्रेड करने का फैसला लिया है।
-
फ्रांस ने तेहरान स्थित दूतावास से गैर-जरूरी स्टाफ वापस बुलाया
-
अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की एडवाइजरी जारी की
-
क़तर स्थित अमेरिकी अल उदैयद मिलिट्री बेस पर फाइटर जेट्स और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की भारी आवाजाही देखी जा रही है
ट्रंप का बड़ा आर्थिक हमला: 25% अतिरिक्त टैरिफ
सैन्य कार्रवाई से पहले ट्रंप ने ईरान पर बड़ा इकोनॉमिक अटैक किया है।
ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है।
इस फैसले से:
-
ईरान का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सीमित होगा
-
कच्चे तेल (Crude Oil) का निर्यात और मुश्किल हो जाएगा
-
चीन, रूस और भारत जैसे प्रमुख ट्रेड पार्टनर दबाव में आएंगे
भारत पर क्या होगा असर?
भारत और ईरान के बीच सालाना करीब 2 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है।
भारत ईरान को क्या निर्यात करता है?
-
बासमती चावल
-
चाय और चीनी
-
दवाइयां
-
मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स
भारत ईरान से क्या आयात करता है?
-
पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स
-
ड्राई फ्रूट्स और सेब
-
केमिकल्स और मिनरल्स
अगर भारत ईरान से व्यापार जारी रखता है, तो अमेरिका जाने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। पहले से ही भारत पर 50% टैरिफ लागू है, जो बढ़कर 75% तक जा सकता है।
ऐसे में भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापार बेहद मुश्किल हो सकता है।