दिल्ली में गाजीपुर (Ghazipur) के पास बने कचरे के पहाड़ को देखकर अक्सर लोग हैरान हो जाते हैं. वहां भयानक बदबू भी आती है. हालांकि, धीरे-धीरे उस पहाड़ से कचरे को हटाया जा रहा है. लेकिन आज हम आपको 2000 साल पुराने एक ऐसे कूड़े के पर्वत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप दिल्ली वाले कचरे के पहाड़ को भूल जाएंगे.
इटली की राजधानी रोम (Rome, Italy) में स्थित ‘मोंटे टेस्टाकिओ (Monte Testaccio)’ नाम की यह पहाड़ी असल में दुनिया का सबसे प्राचीन और व्यवस्थित कचरा डंपिंग यार्ड है, जो आज भी अपने भीतर रोमन साम्राज्य (Roman Empire) के कई राज समेटे हुए है. यह विशाल पहाड़ी टाइबर नदी (River Tiber) के पूर्वी तट के पास स्थित है.
पहली नजर में यह घास और छोटे पेड़ों से ढकी किसी सामान्य प्राकृतिक पहाड़ी जैसी लगती है, लेकिन इसके भीतर कोई मिट्टी या पत्थर नहीं, बल्कि करोड़ों मटके दबे हुए हैं. आर्कियोलॉजिस्ट के अनुसार, यह पूरी पहाड़ी जैतून के तेल (Olive Oil) के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के जारों (जिन्हें Amphorae कहा जाता है) के टुकड़ों से बनी है.
अनुमान है कि इस पर्वत में लगभग 5.3 करोड़ मटके दफन हैं. 2,000 साल पहले रोम दुनिया का सबसे बड़ा शहर था और वहां जैतून के तेल की मांग इतनी अधिक थी कि खाली होने के बाद इन मटकों ने एक पहाड़ का रूप ले लिया. जैतून के तेल के इन मटकों को दोबारा इस्तेमाल करना या रीसायकल करना असंभव था, क्योंकि तेल सोखने के बाद ये चिपचिपे हो जाते थे और उससे दुर्गंध आने लगती थी.
इसीलिए रोमन इंजीनियरों ने इसे ठिकाने लगाने के लिए एक बहुत ही व्यवस्थित तरीका अपनाया. उन्होंने मटकों को एक के ऊपर एक खास पैटर्न में जमाया और तेल की सड़ांध को रोकने के लिए उन पर चूने (Lime) का छिड़काव किया. आज यह पहाड़ी 35 मीटर ऊंची है और करीब एक किलोमीटर के घेरे में फैली हुई है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन समय में इसकी ऊंचाई इससे कहीं अधिक रही होगी. मोंटे टेस्टाकिओ की सबसे खास बात यह है कि इन मटकों के टुकड़ों पर आज भी रोमन व्यापारियों के सील और शिलालेख सुरक्षित हैं. इन पर लिखा होता था कि तेल का वजन कितना है, इसे कहां भरा गया और किस निर्यातक ने इसे भेजा था. यह जानकारी आज के इतिहासकारों के लिए उस दौर की अर्थव्यवस्था और व्यापार को समझने का सबसे बड़ा जरिया है.