ऊंची इमारतों पर क्यों लगी रहती है Red Light, क्या है इसका असली कारण, जानिए इसके पीछे का...

रेड लाइट का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में “खतरे” या “रुकने” का संकेत आता है, चाहे वो ट्रैफिक सिग्नल हो या रेलवे लाइन. लेकिन क्या आपने कभी रात के समय आसमान की ओर देखते हुए ऊंची-ऊंची इमारतों की छत पर टिमटिमाती लाल बत्तियों पर ध्यान दिया है? दूर से ये लाइट्स छोटी-छोटी चमकती हुई नजर आती हैं, जैसे कोई संकेत दे रही हों.

कई लोग इन्हें सिर्फ सजावट या डिजाइन का हिस्सा समझ लेते हैं, लेकिन सच कुछ और है, इससे कहीं ज्यादा जरूरी और दिलचस्प. दरअसल, इन लाल कलर की लाइट के पीछे एक अहम वैज्ञानिक कारण और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मकसद छिपा होता है.


हवाई जहाजों की सुरक्षा में निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका

ऊंची इमारतों पर लगी लाल बत्तियों का सबसे जरूरी काम हवाई जहाजों और हेलीकॉप्टरों को सुरक्षित रास्ता दिखाना है. रात के समय, कोहरा, धूल या खराब मौसम में पायलट्स के लिए जमीन पर मौजूद ऊंची चीजों को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में ये लाल लाइट्स एक चेतावनी के रुप में काम करती हैं और पहले ही बता देती हैं कि आगे कोई ऊंचा ढांचा मौजूद है. इससे पायलट समय रहते दिशा बदल सकते हैं और किसी भी संभावित हादसों से बचाव हो जाता है.

नियम क्या कहता है

इस तरह की लाइट्स लगाना एक जरूरी नियम है. अंतरराष्ट्रीय लेवल पर International Civil Aviation Organization (ICAO) और भारत में Directorate General of Civil Aviation (DGCA) यह तय करते हैं कि किन-किन ऊंचे ढांचों या फिर ऊंची इमारतों पर ये लाइट्स लगाना जरूरी होता है. आमतौर पर 45 मीटर (करीब 150 फीट) से ज्यादा ऊंचाई वाली इमारतों, मोबाइल टावरों, चिमनियों और अन्य बड़े स्ट्रक्चर्स पर ये लाल कलर की लाइट्स लगाई जाती हैं.

आखिर लाल रंग की लाइट्स ही क्यों

अब सवाल आता है कि आखिर ये लाइट्स लाल कलर के ही क्यों होते हैं. इसके पीछे कई कारण हैं-

. लंबी वेव लेंथ– लाल रंग की रोशनी की तरंग लंबी होती है, जिससे यह धुंध, धूल या नमी में भी आसानी से दिखाई देती है.
. रात में बेहतर दृश्यता– अंधेरे में हमारी आंखें लाल रोशनी को जल्दी पहचान लेती हैं, जिससे यह पायलट्स के लिए एक साफ संकेत बनती है.
. दुनिया भर में माना जाता है खतरे का संकेत– दुनिया भर में लाल रंग को खतरे और सावधानी के संकेत के रूप में माना जाता है, इसलिए हर देश का पायलट इसे तुरंत समझ जाता है.

कैसे काम करती हैं ये लाइट्स?

इन लाल बत्तियों में आमतौर पर LED तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो कम बिजली में ज्यादा रोशनी देती हैं. ये लाइट्स लगातार जलने के बजाय टिमटिमाती रहती हैं (फ्लैश करती हैं), ताकि दूर से भी तुरंत ध्यान आकर्षित कर सकें. नई तकनीक वाली लाइट्स में एक खास फीचर होता है ये दिन और रात के हिसाब से अपनी चमक बदल लेती हैं.

दिन में ये थोड़ी हल्की रहती हैं, जबकि रात में ज्यादा तेज चमकती हैं ताकि अंधेरे में साफ दिखाई दें. पहली नजर में ये लाल लाइट्स आपको भले ही मामूली लगें, लेकिन असल में ये हजारों लोगों की जान बचाने में मदद करती हैं. अगर ये लाइट्स ना हों , तो रात के समय या खराब मौसम में पायलट्स के लिए ऊंची इमारतों से टकराने का खतरा बढ़ सकता है और हजारों लोगों की जान जा सकती है.

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