क्यों अलग होती हैं संजय लीला भंसाली की फिल्में? इन 5 कारणों में छुपा है उनका जादू, क्या है सीक्रेट फॉर्मूला...

भारतीय सिनेमा के मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली हिंदी सिनेमा की दुनिया के सबसे बड़े जादूगरों में से एक माने जाते हैं। उनकी फिल्में ऐसी होती हैं जो किसी को भी एक नई दुनिया में पहुंचा दें। खुद संजय लीला भंसाली का भी फिल्मों तक का सफर किसी अजूबे से कम नहीं है। 300 स्कवायर फीट के चॉल से निकलकर उन्होंने एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया और सबसे खास बात कि जिन जज्बातों को वो पर्दे पर दिखाते हैं वह खुद भी उन जज्बातों को जी चुके हैं।

अधूरा प्यार, तवायफ, कोठे ये सभी उनकी फिल्मों का हिस्सा होते हैं, क्योंकि उन्होंने ये सब बेहद नजदीक से महसूस किया है। उनकी फिल्में अन्य फिल्ममेकर्स से काफी अलग होती हैं, जिसके चलते दर्शक भी उनकी फिल्मों तक खींचे चले जाते हैं। संजय लीला भंसाली आज अपना 63वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर आपको दिग्गज फिल्म निर्माता की फिल्मों की उन पांच खासियतों के बारे में बताते हैं, जो उनकी फिल्मों को अन्य फिल्ममेकर्स की फिल्म से अलग बनाती हैं।

राजसी सेट

संजय लीला भंसाली को लेकर एक बाद मशहूर है कि वह अपनी फिल्मों के निर्माण के दौरान किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करते और अपनी फिल्मों पर पैसे पानी की तरह बहाते हैं। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत होती है फिल्म के राजसी सेट। अपनी फिल्मों के लिए संजय लीला भंसाली एक नई दुनिया ही बसा डालते हैं। उनकी फिल्मों के सेट इतने भव्य होते हैं कि देखने वालों की आंखें चौधिया जाएं। यहां तक कि कई बड़े स्टार भी उनकी फिल्मों के सेट्स की तारीफ कर चुके हैं।

शानदार संगीत

संजय लीला भंसाली की फिल्मों कि एक और खासियत है इनके शानदार संगीत। फिल्मों का संगीत तैयार करने में वह महीनों का समय लेते हैं। देवदास का संगीत तो 2 साल में तैयार किया गया था और हर गाना इतना जटिल था कि संगीत मिलाने के लिए 8-10 टेक लेने पड़ते थे। ‘हम दिल दे चुके सनम’ से लेकर ‘हीरामंडीः द डायमंड बाजार तक’, संजय लीला भंसाली की फिल्मों के संगीत ने हमेशा ही दर्शकों का दिल जीता है। उनकी फिल्मों के कुछ सबसे चर्चित संगीत की बात करें तो ‘नगाड़ा संग ढोल बाजे’, ‘ढोलिडा’ और ‘पिंगा’ जैसे गानों और इनके संगीत ने हर किसी को इंप्रेस किया।

sanjay leela bhansali

संजय लीला भंसाली की हर फिल्म है खास

कास्टिंग

संजय लीला भंसाली की फिल्मों की कास्टिंग भी कुछ कम शानदार नहीं रहती। अपनी फिल्मों के लिए वह कलाकारों का चुनाव काफी सोच-समझकर करते हैं, फिर चाहे वो कितना ही बड़ा और महंगा स्टार क्यों न हो, अगर उन्हें लगता है कि उनकी फिल्म के साथ यही कलाकार न्याय कर सकता है तो वह उसे अप्रोच भी करते हैं और उसके साथ काम भी। अब तक उन्होंने हिंदी सिनेमा के कई बड़े स्टार्स के साथ काम किया है जिनमें सलमान खान, शाहरुख खान, अजय देवगन, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा, रणवीर सिंह, रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण जैसे कलाकारों के नाम शामिल हैं।

कहानी

संजय लीला भंसाली की फिल्मों की कहानी भी बेहद खास होती है। अधूरी प्रेम कहानी का दर्द, तवायफों का दर्द उनकी ज्यादातर फिल्मों का केंद्र रहा है, जिन्होंने दर्शकों को हमेशा भावुक किया है। ‘देवदास’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘पद्मावत’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ तक में संजय लीला भंसाली ने अधूरी प्रेम कहानी का दर्द दर्शकों तक पहुंचाया है।

आउटफिट

संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों की एक-एक बारीकी पर खुद ध्यान देते हैं, यहां तक कि कलाकारों के आउटफिट तक वही चुनते हैं। साल 2002 में रिलीज हुई शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित स्टारर देवदास अपने समय की सबसे मंहगी फिल्म थी और इस पर संजय लीला भंसाली ने 50 करोड़ खर्च किए थे। सबसे महंगा सेट चंद्रमुखी का कोठा।

फिल्म में ऐश्वर्या ने जो साड़ियां पहनी थीं, वह खुद संजय लीला भंसाली ने डिजाइनर नीता लुल्ला के साथ मिलकर कोलकाता से खरीदी थीं, जिनकी लंबाई 8 से 9 मीटर होती थी। वहीं माधुरी के लहंगे डिजाइनर जोड़ी अबू जानी-संदीप खोसला ने तैयार किए थे, जिनकी कीमत 15 लाख के करीब थी। संजय लीला भंसाली की ज्यादातर फिल्मों की यही कहानी है।

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