6 साल बाद होगी ट्रंप और शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात
अमेरिका और चीन के बीच जारी टैरिफ वॉर (Trade War) के बीच आज एक अहम कूटनीतिक पल आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज दक्षिण कोरिया के बुसान (Busan) में मुलाकात करेंगे।
यह दोनों महाशक्तियों के बीच 6 साल बाद होने वाली पहली आमने-सामने की बैठक है। पूरी दुनिया की निगाहें इस वार्ता पर टिकी हैं, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता को नई दिशा दे सकती है।
बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत
बैठक से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने इशारा किया है कि ट्रंप चीनी वस्तुओं पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की हालिया धमकी को लागू नहीं करेंगे।
वहीं चीन की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं — रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के निर्यात नियंत्रण में ढील और अमेरिका से सोयाबीन की खरीद बढ़ाने की तैयारी दिखाई गई है।
दक्षिण कोरिया जाते समय ट्रंप ने कहा,
“मुझे उम्मीद है कि टैरिफ कम किया जाएगा क्योंकि चीन फेंटेनाइल मामले में हमारी मदद कर रहा है।”
उन्होंने आगे जोड़ा,
“चीन के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं।”
बुसान में होगी मुलाकात, तीन से चार घंटे चलेगी बैठक
यह मुलाकात एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। बुसान, ग्योंगजू से करीब 76 किलोमीटर दक्षिण स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर है।
ट्रंप ने बुधवार रात अन्य विश्व नेताओं के साथ डिनर के दौरान कहा कि उनकी शी जिनपिंग के साथ बैठक लगभग 3 से 4 घंटे तक चलेगी, जिसके बाद वे सीधे वाशिंगटन लौट जाएंगे।
🇨🇳 अमेरिका ताइवान मुद्दे पर नहीं करेगा चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में अमेरिका ताइवान की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को नहीं उठाएगा।
हाल ही में कुआलालंपुर में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने प्रारंभिक व्यापार सहमति (Initial Trade Understanding) तक पहुंचने के संकेत दिए थे।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे “बहुत सफल रूपरेखा” बताया, जबकि चीन के मुख्य वार्ताकार ली चेंगगांग ने भी सहमति की पुष्टि की थी।
2019 के बाद पहली मुलाकात — क्या लौटेगा भरोसा?
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच पिछली बैठक 2019 में हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने रहे।
आज की बैठक को अमेरिका-चीन संबंधों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह वैश्विक व्यापार बाजार और निवेश माहौल को स्थिर करने में बड़ा कदम साबित हो सकती है।