
नई दिल्ली [News T20 ] | महंगाई से राहत के बीच फिर मुश्किलें बढ़ाने वाली खबर है, क्योंकि भारतीय बाजार में पॉम तेल और सोने-चांदी की कीमतों में जल्द उछाल आ सकता है. ग्लोबल मार्केट में लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने सोने-चांदी और पॉम तेल पर बेस इम्पोर्ट प्राइस बढ़ा दिया है. इससे घरेलू बाजार में इनकी कीमतों पर भी दबाव दिखेगा.
सरकार की कोशिशों से बीते कुछ समय से खाने के तेल की कीमतों में नरमी दिख रही थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया है कि ग्लोबल मार्केट में कीमतों के बढ़ने का दबाव सरकार पर भी था और यही कारण है कि सोने-चांदी के अलावा रिफाइंड पॉम तेल और आरबीडी पॉम तेल दोनों पर ही सरकार ने बेस इम्पोर्ट प्राइस बढ़ाया है.

क्रूड पॉम ऑयल का बेस इम्पोर्ट प्राइस अभी तक 952 डॉलर था, जो अब बढ़कर 960 डॉलर हो गया है. इसी तरह, आरबीडी पॉम ऑयल का बेस इम्पोर्ट प्राइस भी 962 डॉलर से बढ़ाकर 988 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है. आरबीडी पॉमोलिन का बेस इम्पोर्ट प्राइस भी सरकार ने बढ़ाकर 1,008 डॉलर कर दिया है, जो अभी तक 971 डॉलर प्रति टन रहा था. सरकार ने क्रूड सोया ऑयल का बेस इम्पोर्ट प्राइस भी बढ़ाया है. अभी तक यह 1,345 डॉलर था जिसे बढ़ाकर 1,354 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है.
सोने-चांदी पर भी बढ़ाया बेस इम्पोर्ट
सरकार ने पॉम तेल के साथ सोने और चांदी पर भी बेस इम्पोर्ट प्राइस बढ़ा दिया है. सोने का बेस इम्पोर्ट प्राइस 531 डॉलर प्रति 10 ग्राम से बढ़ाकर 570 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दिया है. वहीं, चांदी के बेस इम्पोर्ट प्राइस में 72 डॉलर का इजाफा किया है, जो अब बढ़कर 702 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गया है. अभी तक यह 630 डॉलर प्रति किलोग्राम था.
क्या होता है बेस इम्पोर्ट प्राइस
ग्लोबल मार्केट में पॉम तेल और सोने-चांदी की कीमतों में ज्यादा उछाल आने पर भारतीय आयातकों पर भी दबाव बढ़ता है. सरकार घरेलू बाजार में कीमतों को ग्लोबल मार्केट के अनुरूप बनाए रखने के लिए हर पखवाड़े (15 दिन में) बेस इम्पोर्ट प्राइस की समीक्षा करती है. बेस इम्पोर्ट प्राइस वह दर होती है, जिसके आधार पर सरकार कारोबारियों से आयात शुल्क और टैक्स वसूलती है. भारत सोने के मामले में दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है, जबकि चांदी के मामले में पहले स्थान पर आता है. खाद्य तेलों की भी 60 फीसदी से ज्यादा जरूरत आयात के जरिये पूरी की जाती है.
