ऐसा कहा जाता है कि सैंकड़ों साल पहले गिरे एक उल्कापिंड ने दुनिया से डायनासोर का नामो-निशान मिटा दिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस समय जब सारी दुनिया तबाह हो गई थी तब भी एक ऐसा जीव था, जो जिंदा बच गया था.
हम सब जानते हैं कि 66 मिलियन साल पहले मेक्सिको के चिक्सुलुब में गिरे विशाल उल्कापिंड ने डायनासोरों समेत धरती पर 75% प्रजातियों को मिटा दिया था. आसमान में धूल और धुंआ छा गया था. सूरज की रोशनी सालों तक नहीं पहुंची थी. जंगल जल गए और समुद्रों में एसिडिफिकेशन हो गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायनासोरों के ‘दादा-परदादा’ जैसा एक जीव था, जो इसके बाद भी जिंदा रहा था.
हम बात कर रहे हैं अमोनाइट्स की. ये स्पाइरल शेल वाले समुद्री जीव 340 मिलियन साल से महासागरों पर राज कर रहे थे, लेकिन उल्कापिंड के बाद भी वे तुरंत नहीं मरे. नई रिसर्च में डेनमार्क के स्टेवंस क्लिंट (UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट) से मिले फॉसिल्स ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. पोलिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के प्रोफेसर मार्सिन माचल्स्की की टीम ने साइंटिफिक रिपोर्ट्स में पब्लिश स्टडी में बताया कि अमोनाइट्स उल्कापिंड के बाद डैनियन पीरियड (पेलियोजीन का शुरुआती हिस्सा) में भी 68,000 से 200,000 साल तक जिंदा रहे थे. फिर ये खत्म कैसे हो गए? इसकी भी अलग कहानी है.
डायनासोर के बाद भी थे जिंदा
ये फॉसिल्स सेरिथियम लाइमस्टोन में मिले, जो K-Pg बॉउंड्री (क्रेटेशियस-पेलियोजीन सीमा) के ऊपर हैं. पहले वैज्ञानिक मानते थे कि अमोनाइट्स तुरंत खत्म हो गए क्योंकि उल्कापिंड ने प्लैंकटन को मार डाला, जिससे फूड चेन टूट गई. लेकिन स्टेवंस क्लिंट के फॉसिल्स में Hoploscaphites, Baculites और Fresvillia जैसे जीनस के सैंपल मिले हैं.
इनमें कोई मिसमैच्ड सेडिमेंट या डैमेज नहीं है बल्कि डैनियन लाइमस्टोन के स्पॉन्ज स्पाइक्यूल्स और डिसॉल्यूशन वॉइड्स हैं. इससे साबित होता है कि ये जीव उस समय तैर रहे थे, जब डायनासोर पहले ही खत्म हो चुके थे.
ये ‘डेड क्लेड वॉकिंग’ का क्लासिक उदाहरण है यानी जीव बच तो जाता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म स्ट्रेस से कमजोर होकर बाद में गायब हो जाता है. अमोनाइट्स ने पहले तीन बड़े एक्सटिंक्शन (डेवोनियन, पर्मियन, ट्रायसिक) झेले थे, लेकिन K-Pg के बाद इकोसिस्टम रिकवरी धीमी थी. प्लैंकटन चेन कमजोर रही, प्रीडेटर्स रिकवर हुए और अमोनाइट्स की रिप्रोडक्शन रेट कम होने से वे धीरे-धीरे खत्म हो गए.
बचे रह गए रिश्तेदार
नॉटिलॉइड्स (आज के नॉटिलस) बच गए क्योंकि उनकी लाइफ साइकिल धीमी और हैबिटेट फ्लेक्सिबल थी. स्टेवंस क्लिंट की चट्टानें K-Pg बॉउंड्री की परफेक्ट लेयर्स दिखाती हैं. नीचे क्रेटेशियस चॉक, ऊपर डैनियन लाइमस्टोन. यहां इरिडियम लेयर (उल्कापिंड का निशान) भी साफ है. रिसर्चर्स ने फॉसिल्स को माइक्रोस्कोपिकली चेक किया.
इसमें कोई री-डिपॉजिटेड नहीं मिला बल्कि ओरिजिनल पोस्ट-इम्पैक्ट मिले. यह खोज एक्सटिंक्शन की थ्योरी को नया रूप दे रही है. पहले अमोनाइट्स को ‘इंस्टेंट विक्टिम’ माना जाता था, लेकिन अब पता चला कि वे ‘सर्वाइवर’ थे लेकिन सिर्फ थोड़े समय के लिए. वैज्ञानिक कहते हैं कि फ्यूचर डिग्स से और टाइमलाइन आगे बढ़ सकती है. अमोनाइट्स की स्पाइरल शेल्स आज भी फॉसिल कलेक्टर्स के लिए खूबसूरत हैं. वे सीफूड जैसे जीव थे, जो महासागरों में तैरते और शिकार करते थे.