दुनिया का 'सबसे डरावना' एयरपोर्ट, जहां प्लेन उतारने में कांप जाते हैं पायलट!

इतिहास में कुछ जगहें ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी रोमांच, खतरे और असाधारण कौशल से भरी होती है. काई टाक एयरपोर्ट (Kai Tak Airport) भी उन्हीं में से एक था, जिसे 73 साल तक दुनिया का ‘सबसे डरावना’ एयरपोर्ट माना जाता था. यह एयरपोर्ट पायलटों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, जहां एक छोटी सी गलती में सबकुछ खत्म हो सकता था.

अनुभवी पायलट्स भी लैंडिंग से पहले कांप जाते थे. आज भले ही यह जगह एक शांत क्रूज टर्मिनल में बदल चुकी हो, लेकिन इसकी खौफनाक विरासत आज भी कायम है. बता दें कि यहां जहाजों को उतारने के लिए पायलटों को इमारतों को छूते हुए आखिरी पल में 47 डिग्री का असंभव-सा मोड़ लेना पड़ता था, जिसे देखकर यात्रियों के होश उड़ जाते थे. इतना ही नहीं, विमान में बैठे अनगिनत यात्रियों ने इस भयानक लैंडिंग के दौरान डर के मारे अपनी सीट की आर्मरेस्ट को कसकर पकड़ा होगा.

लैंडिंग के समय विमान आवासीय इमारतों के इतने करीब से गुजरते थे कि खिड़की से झांकने पर ऐसा लगता था कि आप उन घरों के अंदर किचन में क्या पक रहा है, वो भी देख सकते हैं. स्थानीय लोगों के लिए यह एयरपोर्ट एक सिरदर्द बन गया था. विमानों के इंजन की आवाज इतनी तेज होती थी कि लोगों को बातचीत रोकनी पड़ती थी.

कपड़े सुखाने वाली लाइनों से कपड़े उड़ जाते थे और छत के पंखे हिलने लगते थे. इस एयरपोर्ट का सबसे कुख्यात हिस्सा ‘हॉन्ग-कॉन्ग टर्न’ (Hong Kong Turn) था, जहां पायलटों को आखिरी क्षण में अपने जंबो जेट को 47 डिग्री दाहिनी ओर मैन्युअल रूप से मोड़ना पड़ता था. इस टर्न का मार्गदर्शन करने के लिए एक पहाड़ी पर एक बड़ा लाल-और-सफेद चेकबोर्ड पेंट किया गया था. यह इतना चुनौतीपूर्ण था कि पायलटों को बिना किसी दुर्घटना के विमान उतारने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेना पड़ता था.

क्यों बंद हुआ दुनिया का यह अनोखा एयरपोर्ट?

यह एयरपोर्ट कैथे पैसिफिक और ड्रैगनएयर जैसी एयरलाइंस का महत्वपूर्ण हब था, लेकिन विस्तार की कोई गुंजाइश न होने और ध्वनी प्रदूषण की वजह से हॉन्ग-कॉन्ग के चेक लैप कोक (Chek Lap Kok) में नया हवाई अड्डा बनाया गया. इसके बाद 6 जुलाई 1998 को काई टाक एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया.

73 सालों तक इस एयरपोर्ट से जहाजों ने उड़ान भरी थी. ऐसे में आखिरी उड़ान देखने के लिए उस दिन हजारों लोगों की भीड़ समुद्र तट पर जमा हुई थी. हालांकि, आज दुनिया के इस सबसे मुश्किल एयरपोर्ट की जगह इतनी बदल गई है कि विश्वास करना मुश्किल है. पहले का रनवे अब काई टाक क्रूज टर्मिनल में बदल गया है, जो लंदन के ‘द गर्किन’ (The Gherkin) के आर्किटेक्ट द्वारा डिज़ाइन किया गया एक फ्यूचरिस्टिक कॉम्प्लेक्स है. जंबो जेट्स की जगह अब हार्बर में विशाल क्रूज लाइनर आते हैं. जहां कभी एक बिजी रनवे था, वह अब शांत सार्वजनिक पार्क है, जहां लोग टहलते हैं.

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