मौत — एक अनिवार्य सत्य (Death: The Ultimate Truth)
मृत्यु वो सच है, जिससे कोई नहीं बच सकता। जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन इस संसार को छोड़ना ही पड़ता है। विज्ञान ने भले ही “मौत के बाद क्या होता है” इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश की हो, लेकिन आज तक इसका रहस्य नहीं सुलझा। वहीं गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में हजारों साल पहले ही इस रहस्य से पर्दा उठाया जा चुका है।
गरुड़ पुराण का रहस्य: आत्मा की पहली रात कैसी होती है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा के लिए पहली रात सबसे कठिन और पीड़ादायक होती है। जब प्राण शरीर से निकल जाते हैं, तो आत्मा सूक्ष्म रूप में शरीर के पास ही मंडराती है। उसे अपनी मौत का एहसास तो होता है, लेकिन वह परिवार और अपने शरीर को छोड़ नहीं पाती।
इस दौरान आत्मा को भूख, प्यास, दुख और भय जैसी अनुभूतियां होती हैं, जैसे वह अभी जीवित हो। यही कारण है कि हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद “प्रेत” की स्थिति मानी जाती है, और आत्मा की शांति के लिए विशेष कर्मकांड किए जाते हैं।
पहली रात में आत्मा को क्यों होता है कष्ट?
गरुड़ पुराण बताता है कि आत्मा “सूक्ष्म देह” में बंधी रहती है, जिसके कारण वह इंद्रियों की इच्छाओं से मुक्त नहीं हो पाती। वह अपने घर, परिवार और शरीर को बार-बार देखने की कोशिश करती है। लेकिन उसे कोई देख या सुन नहीं सकता। यह स्थिति आत्मा के लिए अत्यंत कष्टदायक होती है।
रात के अंत में यमदूत आते हैं —
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सत्कर्मी आत्माओं के लिए विष्णुदूत आते हैं, जो फूलों की वर्षा करते हुए रथ पर उन्हें स्वर्गलोक ले जाते हैं।
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पापी आत्माओं के लिए यमराज के भयानक दूत आते हैं, जो उन्हें कठोरता से यमपुरी की ओर ले जाते हैं।
विज्ञान बनाम धर्म: कौन सच्चाई के करीब?
आधुनिक विज्ञान ने NDE (Near Death Experience) यानी मृत्यु के करीब अनुभवों पर कई अध्ययन किए हैं। लेकिन आत्मा की यात्रा या मृत्यु के बाद की चेतना का वैज्ञानिक प्रमाण अब तक नहीं मिला।
दूसरी ओर, गरुड़ पुराण आत्मा की हर अवस्था, उसके कर्मफल और पुनर्जन्म तक की यात्रा का सटीक और गूढ़ वर्णन करता है।
गरुड़ पुराण का संदेश (Garuda Purana’s Message)
गरुड़ पुराण सिखाता है कि अच्छे कर्म ही आत्मा की मुक्ति का मार्ग हैं। मृत्यु का भय केवल उसी को होता है, जिसने जीवन में पाप और अधर्म का मार्ग अपनाया हो। जो सच्चे कर्म करता है, उसके लिए मृत्यु एक नई यात्रा की शुरुआत है, अंत नहीं।