यहां सजता है सांप के मीट का सबसे बड़ा बाजार, हलाल या झटका, मनमर्जी से कटवा कर ले जाते हैं लोग

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक ऐसा बाजार है जो दुनिया भर में अपनी अनोखी और शॉकिंग वजह से मशहूर है. यहां सांप के मीट का सबसे बड़ा और खुला बाजार लगता है. मंग्गा बेसर (Mangga Besar) इलाके की सड़कों पर शाम ढलते ही स्टॉल्स सज जाते हैं, जहां जिंदा कोबरा और दूसरे सांप बिकते हैं. लोग अपनी मर्जी से सांप को कटवाते हैं. कोई हलाल तरीके से (इस्लामी रीति से गले काटकर) या झटका मारकर– और फिर उसका मीट, खून, पित्त या अन्य हिस्से घर ले जाते हैं.

काफी मशहूर है बाजार

यह बाजार ना सिर्फ लोकल लोगों के लिए, बल्कि चाइनीज और दूसरे एशियाई पर्यटकों के बीच भी काफी पॉपुलर है, क्योंकि यहां कोबरा, कोबरा ब्लड शॉट्स और ‘कोबरा पकोड़े’ जैसी चीजें मिलती हैं. यह सब कैसे शुरू हुआ? दक्षिण-पूर्व एशिया में सांप का मीट और खून सदियों से पारंपरिक दवा के रूप में इस्तेमाल होता रहा है.

लोग मानते हैं कि कोबरा का खून स्टैमिना बढ़ाता है, पित्त त्वचा रोग ठीक करता है और मीट एनर्जी देता है. जकार्ता में ये कल्चर काफी मजबूत है, खासकर मंग्गा बेसर जैसे इलाकों में जहां स्ट्रीट वेंडर्स शाम 5-6 बजे से रात 2 बजे तक स्टॉल लगाते हैं.

इतनी है कीमत

एक सेट मेन्यू में कोबरा, ब्लड और बाइल (पित्त) मिलता है, जिसकी कीमत करीब 90,000 से 300,000 इंडोनेशियन रुपिया (लगभग 500-2000 रुपये) होती है. किंग कोबरा पैकेज महंगा पड़ता है क्योंकि ये जहरीला और दुर्लभ माना जाता है. हाल ही में वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जकार्ता के एक रोडसाइड स्टॉल पर कोबरा पकोड़े, स्नेक ब्लड और नूडल जैसी डिशेज दिखाई गई.

वीडियो में साफ दिखता है कि क्रेट में जिंदा सांप रखे हैं और कस्टमर की डिमांड पर उन्हें तुरंत काटकर तैयार किया जाता है. यह देखकर नेटिजन्स हैरान रह गए क्योंकि भारत में सांपों को पूजनीय माना जाता है और नाग पंचमी जैसे त्योहारों में उनकी रक्षा की जाती है.

चाव से खाते हैं लोग

इंडोनेशिया में सांप खाना आम है. इंडोनेशिया मुस्लिम बहुल देश है (जनसंख्या का 87% मुस्लिम), जहां इस्लाम के अनुसार रेप्टाइल्स (सरीसृप) जैसे सांप का मीट हराम माना जाता है. फिर भी ये प्रैक्टिस जारी है, क्योंकि ये प्री-इस्लामिक कल्चर से आता है और कई लोग इसे मेडिसिनल मानते हैं. मुस्लिम कस्टमर्स कम होते हैं, लेकिन चाइनीज कम्युनिटी और टूरिस्ट्स की वजह से डिमांड बनी रहती है.

कुछ स्टॉल्स पर सांप को ग्रिल करके पीएनट सॉस, प्याज और चिली के साथ सर्व किया जाता है. मीट च्यूई और लीन होता है, चिकन जैसा लेकिन टफ होता है. यह बाजार सिर्फ मीट तक सीमित नहीं है. सांप का खून अरक (लोकल स्पिरिट) में मिलाकर शॉट्स दिए जाते हैं, और पित्त को ड्राई करके बेचा जाता है. कुछ जगहों पर बाइवाक (मॉनिटर लिजर्ड) भी मिलता है.

हालांकि वाइल्डलाइफ ट्रेड रेगुलेटेड है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में इललीगल ट्रेड की बात आती है. कोरोना के समय में भी जकार्ता के कुछ मार्केट्स में सांप, बैट्स और रैट्स बिकते रहे, जिससे जूनोटिक डिजीज (एनिमल से इंसान में फैलने वाली बीमारियां) का खतरा बढ़ा था. इंडोनेशियन गवर्नमेंट ने वाइल्ड एनिमल ट्रेड पर कुछ बैन लगाए, लेकिन एन्फोर्समेंट कमजोर है. जकार्ता के अलावा, टोमोहॉन (उत्तर सुलावेसी) जैसे मार्केट्स में भी सांप मीट मिलता है, लेकिन जकार्ता का मंग्गा बेसर सबसे फेमस है.

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