लोकसभा में गूंजा ‘एकल शिक्षक स्कूल’ का मुद्दा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाए सवाल...

नई दिल्ली में संसद सत्र के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और ‘एकल शिक्षक’ व्यवस्था का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि यह समस्या न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के कई राज्यों में शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

एकल शिक्षक स्कूलों पर जताई चिंता

सांसद अग्रवाल ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के जरिए बताया कि कई प्राथमिक स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
👉 यह स्थिति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के मानकों के खिलाफ है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि:

  • ऐसे स्कूलों को खत्म करने की समय-सीमा क्या है?
  • दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

‘PM श्री’ योजना पर भी उठाए सवाल

अग्रवाल ने PM SHRI Scheme के तहत बने स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के कम उपयोग पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि:

“सिर्फ आधुनिक बिल्डिंग बनाने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, जब तक विषय-विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे।”

सरकार का जवाब: राज्यों की जिम्मेदारी

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि:

  • शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है
  • शिक्षकों की भर्ती और तैनाती राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है
  • केंद्र ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दे रहा है

दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए नई पहल

सरकार ने बताया कि:

  • पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए आवासीय क्वार्टर बनाए जा रहे हैं
  • महिला शिक्षकों के लिए विशेष सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है
  • इससे शिक्षकों का रिटेंशन बेहतर होगा

डिजिटल ट्रेनिंग और फंडिंग

शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं:

  • ‘निष्ठा’ (NISHTHA) प्रोग्राम के जरिए डिजिटल ट्रेनिंग
  • प्रति शिक्षक ₹2,500 तक सहायता
  • DIET के माध्यम से ₹3 लाख तक बजट आवंटन

डेटा और मॉनिटरिंग पर जोर

सरकार के अनुसार:

  • UDISE+ डेटा (2024-25) में एकल शिक्षक स्कूलों की जानकारी उपलब्ध है
  • राज्यों को RTE मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं
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