इस देश में भी हुआ था 'भोपाल गैस हादसा', हवा में घुल गया था जहर, आज भी पैदा होते हैं ऐसे बच्चे!

1976 में इटली में हुआ था दुनिया का सबसे खतरनाक केमिकल प्रदूषण हादसा

1984 की भोपाल गैस त्रासदी को दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा माना जाता है, लेकिन इससे आठ साल पहले इटली के सेवेसो (Seveso) में भी वैसा ही भयावह हादसा हुआ था।
यह घटना इतनी खतरनाक थी कि इसका असर आज भी वहां पैदा होने वाले बच्चों में दिखाई देता है।

 ‘सेवेसो डिजास्टर’: हवा में फैला जहरीला धुआं

10 जुलाई 1976 को मिलान के पास स्थित ICMESA के केमिकल प्लांट में रिएक्टर फट गया।
इस धमाके से TCDD (टेट्राक्लोरोडिबेंजो-पैराडाइऑक्सिन) नामक जहरीला केमिकल हवा में फैल गया।

  • TCDD दुनिया का सबसे खतरनाक डाइऑक्सिन माना जाता है

  • इसी का उपयोग वियतनाम युद्ध में ‘एजेंट ऑरेंज’ में किया गया था

  • जहर हवा, मिट्टी और पानी में घुलकर सालों तक असर करता रहा

शुरुआत में कंपनी ने इसे “क्लोरीन लीक” कहा, जिससे लोगों को देर से बचाया गया और हालात बिगड़ते चले गए।

5900 लोग प्रभावित, हजारों बच्चे हुए बीमार

जहर का असर तेजी से फैल गया—

  • 5900 लोग सीधे एक्सपोज्ड हुए

  • बच्चों में त्वचा रोग, आंखों में जलन, उल्टी और बेहोशी के मामले बढ़े

  • सैकड़ों पालतू जानवर अचानक मरने लगे

  • सबसे ज्यादा जहरीले जोन A से 736 लोगों को तुरंत हटाया गया

मिट्टी हटाई गई, घर गिराए गए, लेकिन दूषित फल, सब्जियां, दूध और पानी ने प्रदूषण को और बढ़ाया।

डाइऑक्सिन का असर आज तक: जन्मजात विकृतियां और कैंसर के मामले

सेवेसो में TCDD का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

👶 जन्म लेते बच्चों में—

  • दिल की बीमारियां

  • न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

  • लर्निंग डिसेबिलिटी

  • जन्मजात विकृतियां

⚠️ महिलाओं में—

  • मिसकैरेज बढ़े

  • हार्मोनल डिसऑर्डर

  • गर्भपात के मामलों में वृद्धि

अध्ययनों में पाया गया कि कैंसर के मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी हुई।
2001 तक 30 से अधिक कैंसर मौतें सीधे इस हादसे से जुड़ी पाई गईं।

हादसे के बाद बना यूरोप का सबसे बड़ा सेफ्टी कानून

ICMESA प्लांट स्विस कंपनी Hoffman-La Roche की सहायक कंपनी थी।
मुकदमे चले, लेकिन मुआवजा था बेहद कम—सिर्फ 20 मिलियन डॉलर

इसके बाद यूरोपीय संघ ने ‘Seveso Directive’ बनाया, जिससे इंडस्ट्री सेफ्टी नियम बेहद सख्त हुए।

आज सेवेसो में पार्क बन चुका है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि मिट्टी अभी भी जहरीली है और हादसे का प्रभाव खत्म नहीं हुआ है।

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