89,91,30,00,00,000 रु खर्च कर बसाया गया खूबसूरत शहर, आज है वीरान, नहीं रहता कोई...

मलेशिया में फॉरेस्ट सिटी को नब्बे खरब खर्च कर बसाया गया था. इसे टूरिस्ट्स के लिए बनाया जा रहा था जहां उन्हें एक ही जगह सारी सुविधाएं मिलती. इसके अलावा यहां लग्जरी का सारा इंतजाम किया गया था. लेकिन बीच में कोरोना की वजह से ये प्रोजेक्ट लटक गया. आज ये प्रोजेक्ट घोस्ट टाउन में बदल चुका है.

मलेशिया में एक ऐसा शहर है, जिसे बनाने में करीब 100 बिलियन डॉलर यानी लगभग 89,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए. लेकिन आज यह पूरी तरह वीरान और सुनसान पड़ा है. फॉरेस्ट सिटी (Forest City) नाम का यह मेगा प्रोजेक्ट कभी सपनों का शहर कहा जाता था, लेकिन अब इसे दुनिया के सबसे महंगे घोस्ट टाउन में से एक माना जाता है.

यह प्रोजेक्ट 2016 में चीनी प्रॉपर्टी डेवलपर कंट्री गार्डन (Country Garden) ने शुरू किया था, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा था. चार आर्टिफिशियल आइलैंड्स पर 30 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला यह शहर जोहोर स्ट्रेट में सिंगापुर के ठीक सामने स्थित है. प्लान था कि यहां लग्जरी अपार्टमेंट्स, गोल्फ कोर्स, वाटरपार्क, शॉपिंग मॉल, होटल्स और ऑफिसेस होंगे, जहां 7 लाख तक लोग रह सकेंगे. लेकिन आज यहां कोई नहीं रहता.

प्रॉजेक्ट को लगी नजर

इस प्रॉजेक्ट का मुख्य टारगेट चाइनीज मिडिल क्लास था, जो सस्ते दामों में सीव्यू लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदकर निवेश कर सके. शुरुआत में बिक्री अच्छी हुई, खासकर चीन से. लेकिन जल्द ही मुसीबतें शुरू हो गई. 2017 में चीन सरकार ने विदेशों में कैपिटल आउटफ्लो पर सख्ती की. सालाना 50,000 डॉलर की लिमिट लगा दी.

इससे चाइनीज खरीदार पीछे हट गए. इसके अलावा मलेशिया में 2018 में महाथिर मोहम्मद की सरकार आई, जिन्होंने चाइनीज निवेश पर सवाल उठाए और विदेशियों के लिए प्रॉपर्टी खरीद पर कई पाबंदियां लगा दी. फिर 2020 में कोरोना महामारी ने सब कुछ ठप कर दिया.

बॉर्डर बंद हो गए, ट्रैवल रुक गया और निवेश थम गया. राजनीतिक अस्थिरता भी जारी रही. इसका नतीजा ये हुआ कि ये प्रोजेक्ट महज 15-20% ही पूरा हो सका. आज यहां सिर्फ 7,000 से 9,000 लोग रहते हैं, जबकि क्षमता 7 लाख की है.

भूतहा बना शहर

इस सिटी की ऑक्यूपेंसी रेट 1-5% के आसपास है. सड़कें खाली रहती है, मॉल बंद है और इमारतें सुनसान है. कई लोग इसे ‘घोस्ट सिटी’ कहकर मजाक उड़ाते हैं. यहां की इमारतें भव्य हैं, लेकिन ज्यादातर अपार्टमेंट खाली पड़े हैं. लोकल मलेशियन के लिए ये बहुत महंगे थे (एक 2-बेडरूम अपार्टमेंट की कीमत 1.7 लाख डॉलर से ज्यादा). चाइनीज निवेशकों ने भी इन्हें सिर्फ निवेश के लिए खरीदा, रहने के लिए नहीं.

दूरदराज का लोकेशन, जोहोर बह्रू से दूर और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने भी लोगों को दूर रखा. यहां पर्यावरणीय विवाद भी है. लैंड रिक्लेमेशन के लिए मैंग्रोव फॉरेस्ट और सीग्रास मीडोज नष्ट किए गए, जो इकोलॉजिकल रूप से संवेदनशील थे. सिंगापुर ने भी पानी की क्वालिटी और ब्रिज पर असर की शिकायत की थी.

लेकिन 2024-2025 में मलेशियन सरकार ने इसे रिवाइव करने की कोशिशें तेज की है. फॉरेस्ट सिटी को स्पेशल फाइनेंशियल जोन (SFZ) घोषित किया गया. आइलैंड-1 को ड्यूटी-फ्री बनाया, कॉर्पोरेट टैक्स 0-5% तक, स्किल्ड वर्कर्स के लिए 15% इनकम टैक्स किया गया है. फैमिली ऑफिसेस और इंटरनेशनल कंपनियों को आकर्षित करने की योजना बनाई गई है. उम्मीद है कि जल्द ही ये जगह अपने मिशन के हिसाब से काम करेगी.

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