अमेरिका का वो अनोखा गांव, जहां आज भी खच्चर लाते हैं डाक, दुनिया से कटा है इलाका, मन मोह लेगी खूबसूरती!

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक अजूबों में से एक अमेरिका का ‘ग्रैंड कैन्यन’ (Grand Canyon) अपने भीतर कई राज समेटे हुए है. इन्हीं रहस्यों में से सबसे खास है ‘सुपाई’ (Supai) गांव, जो ग्रैंड कैन्यन की गहराई में हवासु कैन्यन (जिसे कैटरेक्ट कैन्यन भी कहा जाता है) के तल पर स्थित है. यह हवासुपाई (Havasupai) नामक नेटिव अमेरिकन कबीले का घर है, जो पिछले 800 से अधिक वर्षों से यहां निवास कर रही है.

इन्हें इंडियन नेशंस के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि सुपाई को पूरे अमेरिका का सबसे अलग-थलग गांव माना जाता है, जहां आधुनिक दुनिया की सड़कें और गाड़ियां आज तक नहीं पहुंच पाई हैं. हवासुपाई का अर्थ है “नीले-हरे पानी के लोग”. यह नाम हवासु क्रीक के उस चमकीले और पारभासी नीले-हरे पानी से आया है, जो सुपाई गांव के बीच से बहता हुआ कोलोराडो नदी में जाकर मिलता है.

इस इंडियंस नेशंस ट्राइब्स की कुल आबादी 600 के करीब है. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन बता दें कि अमेरिका में यूरोपीय लोगों के आने से पहले यह आबादी एक विशाल क्षेत्र पर राज करती थी, जहां वे मक्का, कद्दू और फलियां उगाकर अपना जीवन व्यतीत करते थे. इस गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां आज भी संचार का सबसे पुराना साधन जीवित है.

सुपाई अमेरिका की एकमात्र ऐसी जगह है, जहां डाक (Mail) पहुंचाने के लिए आज भी खच्चरों (Mules) का इस्तेमाल किया जाता है. यहां की हर चिट्ठी, पार्सल और जरूरी सामान खच्चरों की पीठ पर लदकर कैन्यन की गहराइयों तक पहुंचता है. यदि किसी पर्यटक को यहां जाना है, तो उसके पास केवल तीन ही रास्ते हैं- हेलीकॉप्टर, मीलों लंबी पैदल यात्रा, या फिर खच्चर की सवारी. हवासुपाई लोगों का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है.

19वीं शताब्दी में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप और 1919 में ग्रैंड कैन्यन को ‘नेशनल पार्क’ घोषित किए जाने के बाद, इन नेटिव अमेरिकन्स को अपनी ही जमीन से बेदखल होना पड़ा था. लगभग एक सदी तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद 1975 में उन्हें उनकी पैतृक भूमि वापस मिली. आज यह कबीला अपनी संप्रभुता (Sovereignty) के साथ यहां रहता है और अपने कबीलाई कानूनों का पालन करता है.

वर्तमान में सुपाई गांव की आय का मुख्य जरिया पर्यटन है. हर साल 20000 से अधिक पर्यटक इस गांव को घूमने आते हैं. यहां पर्यटकों के लिए छोटे कैफे, स्टोर और एक पोस्ट ऑफिस भी है, जहां से लोग पूरी दुनिया में पोस्टकार्ड भेजते हैं. आधुनिकता की चमक-धमक से दूर, सुपाई और वहां के नेटिव अमेरिकन लोग आज भी प्रकृति के साथ उसी तालमेल में जी रहे हैं, जैसा उनके पूर्वज सदियों पहले जिया करते थे.

क्यों कहा जाता है इंडियन नेशंस?

पहली बार सुनने पर ऐसा लगता है कि अमेरिका की पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव के लोगों का भारत से कोई संबंध रहा है. लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है. इतिहास में एक बड़ी गलतफहमी की वजह से इन्हें ‘इंडियन’ कहा जाने लगा था. इसके पीछे की कहानी और मतलब समझना जरूरी है. जब 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस भारत खोजने निकला था, तो वह गलती से अमेरिका के तट पर पहुंच गया.

उसे लगा कि उसने भारत खोज लिया है, इसलिए उसने वहां के स्थानीय लोगों को ‘Indians’ कहना शुरू कर दिया. तब से अमेरिका के मूल निवासियों को ‘अमेरिकन इंडियन’ या ‘रेड इंडियन’ कहा जाने लगा. अमेरिका में इन कबीलों को अपने क्षेत्रों में खुद का कानून चलाने और सरकार चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, इसलिए उन्हें एक ‘स्वतंत्र राष्ट्र’ (Nation) का दर्जा दिया जाता है, जो अमेरिकी सरकार के भीतर रहकर भी अपनी परंपराओं और नियमों के अनुसार अपनी जमीन का प्रबंधन खुद करते हैं

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