दुनिया में एक ऐसा अनोखा जीव है, जो सर्दियों में अपने ब्रेन को आधे से अधिक बंद कर देता है. उसे कुछ याद नहीं रहता. लेकिन जैसे ही गर्मी का सीजन आता है, उसका जमा हुआ दिमाग फिर से काम करने लगता है और उसे हर बात याद आ जाती है.
दुनिया में कई अनोखे जीव हैं, लेकिन आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल (Urocitellus parryii) सबसे हैरान करने वाला है. ये छोटा-सा गिलहरी जैसा जीव अलास्का, कनाडा और साइबेरिया की बेहद ठंडी जगहों पर रहता है, जहां सर्दियां 8 महीने तक चलती है.
यहां तापमान -30°C से नीचे गिर जाता है. ज्यादातर जीव ठंड से बचने के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन ये स्क्विरल ठंड को ‘सेलिब्रेट’ करता है, हाइबरनेशन में जाकर! ये हाइबरनेशन इतना एक्सट्रीम है कि इसका ब्रेन ज्यादातर समय बंद रहता है. इसकी याददाश्त लगभग खो जाती है, लेकिन वसंत में जागते ही सब कुछ वापस आ जाता है.
जिंदा रहने की अनोखी तरकीब
हाइबरनेशन के दौरान इसका बॉडी टेम्परेचर पानी के फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे -2.9°C तक पहुंच जाता है. ये किसी भी स्तनधारी में सबसे कम दर्ज तापमान है. दिल की धड़कन 200 से घटकर 1-5 बीट्स प्रति मिनट रह जाती है, सांसें मुश्किल से 1-2 बार प्रति मिनट चलती है. ब्रेन एक्टिविटी लगभग शून्य हो जाती है. न्यूरॉन्स सिकुड़ जाते हैं, हजारों-लाखों सिनैप्सेस (न्यूरल कनेक्शन) टूट जाते हैं या विल्ट हो जाते हैं. इंसानों में ऐसा होने पर ब्रेन सेल्स डैमेज हो जाते, स्ट्रोक जैसी स्थिति बन जाती है.
लेकिन ये स्क्विरल बिना किसी स्थायी नुकसान के सर्वाइव करता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि हाइबरनेशन में ब्रेन ‘शटडाउन’ मोड में चला जाता है. ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो 90% तक कम हो जाता है. ब्रेन में इस्केमिया (ऑक्सीजन की कमी) होती है, जो इंसानों में ब्रेन डेथ का कारण बनती है. लेकिन आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल में ब्रेन सेल्स इस स्थिति को सहन कर लेते हैं. हर 2-3 हफ्ते में ये ‘अराउजल’ पीरियड में आते हैं. इसमें शिवरिंग करके बॉडी टेम्परेचर 36-37°C तक लाते हैं, 12-15 घंटे नॉर्मल रहते हैं, फिर दोबारा फ्रीज हो जाते हैं. ये अराउजल ब्रेन को बचाने में मदद करता है.
हैरान हैं वैज्ञानिक
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि स्प्रिंग में जागने पर इनका ब्रेन रिकवर हो जाता है. न्यूरॉन्स दोबारा बढ़ते हैं, सिनैप्सेस रीग्रो करते हैं. कभी-कभी पहले से ज्यादा ही. रिसर्च दिखाती है कि अराउजल के 2 घंटे में ही ब्रेन कनेक्शन रिकवर हो जाते हैं और नए बन जाते हैं. याददाश्त पूरी तरह इंटैक्ट रहती है.
उन्हें खाना ढूंढना, साथी चुनना, सब याद रहता है. स्टडीज में पाया गया कि हाइबरनेशन के बाद 24 घंटे में कॉन्टेक्सचुअल मेमोरी (परिस्थिति आधारित याददाश्त) और मजबूत हो जाती है. ये क्षमता वैज्ञानिकों के लिए गेम-चेंजर है. इंसानों में ब्रेन इंजरी, स्ट्रोक, अल्जाइमर जैसी बीमारियों में न्यूरॉन्स डैमेज हो जाते हैं. लेकिन आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल ब्रेन को प्रोटेक्ट करने के तरीके बताता है.