Tender Dispute: राजधानी रायपुर में 10 फरवरी को साइंस कॉलेज मैदान में प्रस्तावित मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह समारोह को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। आयोजन की तैयारियों, टेंडर प्रक्रिया और एजेंसी चयन को लेकर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी बीच महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) द्वारा लोक निर्माण विभाग (PWD) को कार्य सौंपने के लिए पत्र लिखे जाने और PWD द्वारा असमर्थता जताने की जानकारी से मामला और गरमा गया है।
क्या है पूरा मामला?
साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तैयारियां पहले से शुरू होने की बात सामने आई है। विपक्ष का आरोप है कि वर्क ऑर्डर जारी होने से पहले ही पंडाल और अन्य व्यवस्थाओं का काम शुरू कर दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है। विवाद बढ़ने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने पहले से तय एम्पैनल्ड वेंडर के बजाय PWD को कार्य एजेंसी बनाने का प्रस्ताव भेजा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने PWD को लिखा पत्र
विभागीय पत्र के अनुसार:
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कार्यक्रम 10 फरवरी को आयोजित प्रस्तावित है
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आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था कराने का आग्रह PWD से किया गया
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तय दरों के आधार पर कार्य करने और भुगतान WCD विभाग द्वारा करने का प्रस्ताव दिया गया
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यह प्रस्ताव आंतरिक समिति की अनुशंसा के आधार पर भेजा गया बताया गया है
PWD ने काम करने से जताई असमर्थता (सूत्र)
सूत्रों के मुताबिक PWD ने पत्राचार के माध्यम से इस कार्य को सीधे तौर पर करने में असमर्थता जता दी है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर विभागीय प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

कांग्रेस ने लगाए अनियमितता के आरोप
कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आयोजन में अनियमितता और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है:
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टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
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नियमानुसार CSIDC के माध्यम से निविदा आमंत्रण होना चाहिए था
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केवल चुनिंदा 5 कंपनियों को बुलाकर 24 घंटे में डिजाइन प्रेजेंटेशन मांगा गया
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करोड़ों रुपये के आयोजन में पारदर्शिता नहीं बरती गई
खर्च और प्रक्रिया पर उठे सवाल
विपक्ष का दावा है कि:
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आयोजन पर 4–5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान है
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बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया के काम शुरू होना गंभीर मामला है
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एजेंसी चयन में अचानक बदलाव क्यों किया गया — इसका जवाब सरकार को देना चाहिए
कार्यक्रम नजदीक, बढ़ी प्रशासनिक चुनौती
कार्यक्रम में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में एजेंसी चयन, टेंडर प्रक्रिया और विभागीय समन्वय को लेकर प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है। PWD द्वारा असमर्थता जताने की खबर के बाद अब आगे की व्यवस्था किस एजेंसी से होगी, इस पर नजर बनी हुई है।