दुर्ग जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” नियम को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पेट्रोल पंप एसोसिएशन के सदस्य, पुलिस विभाग और खाद्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सड़क सुरक्षा के लिए कड़ा फैसला
अपर कलेक्टर वीरेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट पेट्रोल न देने के आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आदेश जनहित में लिया गया है और इसका उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
पुलिस विभाग का सहयोग
बैठक में उपस्थित एएसपी सुखनंदन राठौर ने हेलमेट की अनिवार्यता पर जोर देते हुए पेट्रोल पंप संचालकों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव की स्थिति में तुरंत पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों की समस्याएं भी सुनी गईं
बैठक के दौरान पेट्रोल पंप संचालकों ने नियम लागू करने में आने वाली व्यावहारिक परेशानियों से प्रशासन को अवगत कराया। इस पर प्रशासन ने पूर्ण सहयोग और आवश्यक सहायता का आश्वासन दिया।
आमजन की सुविधाओं पर भी जोर
प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंपों पर निम्न सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए:
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वाहन चालकों के लिए हवा की सुविधा
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स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था
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साफ-सुथरे शौचालय की उपलब्धता
इससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पेट्रोल पंपों की व्यवस्था भी सुधरेगी।
क्यों जरूरी है “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” नियम?
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सड़क हादसों में सिर की चोट से होने वाली मौतों को कम करने के लिए
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दोपहिया चालकों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए
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ट्रैफिक नियमों के पालन को सख्ती से लागू करने के लिए
प्रशासन का मानना है कि इस नियम के सख्त पालन से सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आएगा।