भिलाई एवं बिलासपुर के राधास्वामी सत्संग केंद्रों में वसंती उल्लास...

भव्य सजावट व आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया बसंत पंचमी महापर्व

भिलाई/बिलासपुर। राधास्वामी मत का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक उत्सव बसंत पंचमी भिलाई, दुर्ग (सिंधिया नगर) तथा भिलाई शाखा बिलासपुर सत्संग केंद्र, जबड़ापार में अत्यंत हर्ष, श्रद्धा एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर सत्संग भवनों को वसंती फूलों, रंगीन रोशनी एवं आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया, जिसकी मनोहारी छटा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर देने वाली रही।

प्रमुख आकर्षण एवं कार्यक्रम

आध्यात्मिक आरंभ:
उत्सव का शुभारंभ प्रातःकालीन प्रार्थना एवं शब्दा (भजन) गायन के साथ हुआ। सामूहिक शब्द-भक्ति में लीन सत्संगियों ने आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण निर्मित किया।

पीत परिधान की परंपरा:
राधास्वामी मत की विशिष्ट परंपरा के अनुरूप बच्चे, युवा एवं वरिष्ठजन पीले वस्त्रों में उपस्थित रहे। संपूर्ण सत्संग भवन वसंती आभा से सराबोर नजर आया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ:
नन्हें बच्चों एवं युवा प्रतिभाओं द्वारा सामूहिक नृत्य, कव्वाली तथा शब्द-पाठ की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। साथ ही बेबी शो एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा और उल्लास को द्विगुणित किया।

निस्वार्थ सेवा भावना:
‘काम ही पूजा है’ के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए सत्संगियों ने स्वेच्छा से स्वच्छता, सजावट एवं सामुदायिक सेवा कार्यों में सहभागिता की। सामूहिक रूप से सेवा कार्य कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।

पर्यावरण-अनुकूल पहल:
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रात्रिकालीन सजावट में पारंपरिक दीयों के स्थान पर सौर ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित एलईडी लाइट्स का उपयोग किया गया।

ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व

उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी 1861 को प्रथम आचार्य परम पुरुष पूरन धनी स्वामी जी महाराज द्वारा सार्वजनिक सत्संग का शुभारंभ किया गया था तथा 20 जनवरी 1915 को परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज ने दयालबाग की पावन नींव रखी। इन्हीं दिव्य स्मृतियों को समर्पित यह उत्सव प्रेम, दया और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करता है।

कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक आरती संपन्न हुई, पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने प्रीति भोज (प्रसाद) ग्रहण कर उत्सव का समापन किया।

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