छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए बड़ी आध्यात्मिक खबर है। Swami Avimukteshwaranand Saraswati 15 मार्च से तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर आ रहे हैं। इस दौरान वे रायपुर, बेमेतरा और बिलासपुर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर भक्तों को आशीर्वाद देंगे।

मीडिया प्रभारी अशोक साहू के अनुसार, जगद्गुरु शंकराचार्य का यह प्रवास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचने की उम्मीद है।

15 मार्च: रायपुर में भव्य स्वागत और पादुका पूजन

15 मार्च को शंकराचार्य महाराज अहमदाबाद से रायपुर पहुंचेंगे।
Swami Vivekananda Airport पर भक्तों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

विमानतल से वे राजीव नगर स्थित आलोक सिंह के निवास पहुंचेंगे, जहां पारंपरिक विधि-विधान से पादुका पूजन और अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद वे बेमेतरा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सलधा के लिए रवाना होंगे।

16–17 मार्च: सवा लाख शिवलिंग मंदिर का निरीक्षण

बेमेतरा जिले के सलधा में स्थित Sapad Laksheshwar Dham पहुंचने पर संत समाज द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा।

यहां वे नवनिर्मित सवा लाख शिवलिंग मंदिर के निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे।
दो दिनों तक वे मंदिर परिसर में चल रहे कार्यों की समीक्षा करेंगे और वहां कार्यरत कारीगरों व कर्मचारियों को मार्गदर्शन भी देंगे।

18 मार्च: बेमेतरा और बिलासपुर में धार्मिक कार्यक्रम

तीसरे दिन यानी 18 मार्च को उनका कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:

बेमेतरा:
सुबह 7 बजे सलधा से प्रस्थान कर वे कृष्णा विहार (बेमेतरा) में कमलेश दत्त दुबे के निवास पहुंचेंगे, जहां उनका अभिनंदन और पादुका पूजन किया जाएगा।

बिलासपुर:
इसके बाद शंकराचार्य महाराज बिलासपुर पहुंचेंगे। यहां ग्राम चिचिरदा में उनके शिष्य हरीश शाह के ‘कुंज कुटीर फार्महाउस’ में सनातन धर्म के अनुयायी और गौभक्त उनका भव्य स्वागत करेंगे।

कार्यक्रम के बाद वाराणसी के लिए प्रस्थान

बिलासपुर में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद जगद्गुरु शंकराचार्य दोपहर में वाराणसी के लिए रवाना हो जाएंगे।

ज्योतिर्मठ के अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर पहुंचकर शंकराचार्य महाराज के दर्शन और आशीर्वाद का लाभ लें।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर

शंकराचार्य का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर माना जा रहा है। तीन दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।

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