ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होकर फंसे शहबाज–मुनीर, पाकिस्तान में सियासी और धार्मिक बवाल...

दावोस में साइन, पाकिस्तान में हंगामा

इस्लामाबाद/दावोस: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर उस वक्त विवादों में घिर गए, जब उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के चार्टर पर हस्ताक्षर कर दिए।
इस फैसले के बाद पाकिस्तान में सियासी, धार्मिक और जनस्तर पर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है।

क्या है ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?

ट्रंप द्वारा गठित यह बोर्ड शुरुआत में गाजा में युद्धविराम और पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में इसका दायरा वैश्विक संघर्ष समाधान तक बढ़ा दिया गया।
इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप हैं और इसमें—

  • पाकिस्तान

  • UAE

  • हंगरी

  • कोसोवो

  • मोरक्को

  • पराग्वे

सहित कुल 19 देशों के नेता शामिल हैं।

दावोस में ट्रंप–शहबाज की मुलाकात बनी विवाद की जड़

22 जनवरी को हुई साइनिंग सेरेमनी में शहबाज शरीफ ने ट्रंप से हाथ मिलाया और साथ में तस्वीर भी खिंचवाई।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे गाजा में स्थायी शांति और फिलिस्तीनियों की मदद की दिशा में उठाया गया कदम बताया, लेकिन देश के भीतर इसे ठीक उलटे नजरिए से देखा जा रहा है।

सरकार बोली – शांति समर्थन की नीति का हिस्सा

पाक विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 के तहत गाजा शांति योजना के समर्थन में उठाया गया है।
मंत्री अहसन इकबाल ने विरोध करने वालों को “नासमझ” बताते हुए कहा कि—

  • पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ेगी

  • फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता मिलेगी

लेकिन यह बयान भी जनता का गुस्सा ठंडा नहीं कर पाया।

विपक्ष और इस्लामी संगठनों का तीखा हमला

पाकिस्तान के विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने इस फैसले को—

  • “ट्रंप की चापलूसी”

  • “इस्लामी उसूलों से समझौता”

करार दिया है।

JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने संसद में कहा कि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने सत्ता के लिए इस्लाम के सिद्धांतों को ताक पर रख दिया।

वहीं PTI नेता शहरयार अफरीदी ने आरोप लगाया कि इस कदम से “पाकिस्तान की इज्जत गिरवी रख दी गई।”

‘राष्ट्रीय धोखा’ बताकर सोशल मीडिया पर उबाल

पूर्व सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने इसे राष्ट्रीय धोखा कहा।
पाक मीडिया और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई पत्रकारों और इस्लामी संगठनों का कहना है कि—

  • पाकिस्तान हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा

  • अब ‘फिलिस्तीनियों के दुश्मनों’ के साथ मंच साझा किया जा रहा है

बोर्ड में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल

विपक्षी नेता राजा नासिर अब्बास ने पूछा कि बोर्ड में पाकिस्तान की असल हैसियत क्या होगी?
विश्लेषकों का मानना है कि—

  • पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी

  • अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश

के चलते यह फैसला लिया गया, लेकिन यह घरेलू राजनीति में आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

बड़े देशों ने बनाई दूरी, पाकिस्तान अकेला पड़ा

दिलचस्प बात यह है कि—

  • भारत

  • चीन

  • ब्रिटेन

  • फ्रांस

जैसे बड़े देशों ने ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस से दूरी बना ली है। इससे पाकिस्तान में और सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर सरकार ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई।

गाजा में पाक सैनिक भेजने की खबर से आग में घी

विवाद तब और भड़क गया जब यह दावा सामने आया कि ट्रंप के निर्देश पर पाकिस्तान 400 सैनिक गाजा भेज सकता है, जिन्हें हमास के निरस्त्रीकरण में लगाया जाएगा और जिनका खर्च इजरायल उठाएगा।
हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन इस खबर ने पाकिस्तान में गुस्से की लहर तेज कर दी है।

Share on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *