
आरबीआई के रेपो रेट में वृद्धि के बाद अब बैंकों ने भी अनुमान के अनुरूप अपनी ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर दिया है. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लैंडिंग रेट और रेपो लिंक्ड लैंडिंग रेट में 50 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर दिया है. इससे बैंक से लोन लेने वाले मौजूदा और नए ग्राहकों को तगड़ा झटका लगेगा.
दरों में बदलाव के बाद बैंक का ईबीएलआर अब 8.55 फीसदी और आरएलएलआर 8.15 फीसदी हो गया है. दोनों नई दरें 1 अक्टूबर 2022 से लागू हो गई हैं. अगर आपके पास एसबीआई का होम लोन है तो आपके लिए ब्याज 0.50 फीसदी महंगा हो जाएगा.

कितना होगा आपकी जेब पर असर –
आइए इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं. मान लीजिए कि आपके पास बैंक का 35 लाख रुपये (मूलधन) का होम लोन है. इसका टेन्योर 20 वर्ष है. पुरानी दर के हिसाब से आपको इस पर 8.05 फीसदी का ब्याज देना होता था. यानी आपकी ईएमआई 29,384 रुपये हुई. अब नई दर लागू होने के बाद आपको 8.55 फीसदी ब्याज देना होगा.
आपकी ईएमआई बढ़कर 30,485 रुपये हो जाएगी. आप पर हर महीने अब 1,101 रुपये की अतिरिक्त ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा. गौरतलब है कि ब्याज दरें ग्राहक की लोन हिस्ट्री, सिबिल स्कोर, उनके प्रोफाइल और रिस्क असेसमेंट पर निर्भर करती हैं और इनमें बदलाव भी हो सकता है.
मौजूदा ग्राहकों के लिए क्या है इसका मतलब –
बैंक द्वारा बढ़ाई गई ब्याज दर नए व मौजूदा ग्राहक दोनों पर लागू होंगी. हालांकि, मौजूदा ग्राहकों को नई ब्याज दर जरूरी नहीं कि इसी या अगले महीने से देनी हो. आप पर नई दरें रिसेट डेट से लागू होंगी. रिसेट डेट वह तिथि होती है जब बैंक आपको दिए लोन की ब्याज दर पर दोबारा समीक्षा करता है. ये अमूमन एक साल के अंतराल पर होती है.
टेन्योर बढ़ाने से कम रहेगी ब्याज दर-
कुछ कर्जदार ब्याज की रकम को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए टेन्योर बढ़ाने का फैसला करते हैं. इससे बेशक आपकी ईएमआई पहले की तरह ही चलती रहती है और आप पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आता है, लेकिन लंबे समय में आपका कुल ब्याज काफी बढ़ जाता है. इसलिए टेन्योर बढ़ाने से पहले इस बात को जरूर ध्यान में रखें.
