छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हो गई है।
डिवीजन बेंच ने आरोपी अमित जोगी और याचिकाकर्ता सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, एसपी को जिम्मेदारी
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने नोटिस जारी करते हुए रायपुर एसपी को इसकी तामिली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
- नोटिस की तामिली के बाद शपथ पत्र कोर्ट में देना होगा
- दोनों पक्षों को वकील के साथ पेश होने के निर्देश
यह कदम केस की सुनवाई को तेज करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिर खुला केस
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 को अहम आदेश दिया।
- याचिका में हुई देरी को माफ किया
- केस को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेजा
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने के निर्देश
इस फैसले के बाद अब केस की मेरिट के आधार पर फिर से सुनवाई हो रही है।
पहले क्यों खारिज हुई थी अपील?
- 2007 में राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति मांगी थी
- 2011 में हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी
- देरी के आधार पर CBI और शिकायतकर्ता की याचिकाएं भी खारिज हुईं
अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला फिर से खुला है।
2003 में हुई थी हाई-प्रोफाइल हत्या
रामअवतार जग्गी की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
- पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया
- 2 आरोपी सरकारी गवाह बने
- 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया
- अमित जोगी को बरी किया गया
इसी बरी होने के फैसले को चुनौती देते हुए सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।
राजनीतिक कनेक्शन भी चर्चा में
रामअवतार जग्गी का राजनीतिक प्रभाव भी इस केस को हाई-प्रोफाइल बनाता है।
- वे विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे
- एनसीपी में उन्हें छत्तीसगढ़ का कोषाध्यक्ष बनाया गया था
यही वजह है कि यह मामला शुरू से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।