बिना हेलमेट और अवैध साइलेंसर वाली बाइक से घूमने का मामला
रायपुर। राजधानी रायपुर में कानून के समान अनुपालन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सिविल लाइन थाने में पदस्थ एक पुलिसकर्मी पर बिना हेलमेट, बिना वैध बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र के दोपहिया वाहन चलाने तथा अनधिकृत ढोलकी साइलेंसर का उपयोग करने के आरोप सामने आए हैं।
ऑनलाइन चालान के बावजूद नियमों की अनदेखी का दावा
सूत्रों के अनुसार, संबंधित पुलिसकर्मी के नाम पर ऑनलाइन चालान पहले ही दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद कथित रूप से नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रैफिक नियम सभी के लिए समान रूप से लागू हैं?
आम जनता बनाम वर्दीधारी: समानता पर बहस
यह वही पुलिस तंत्र है जो आम नागरिकों को हेलमेट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र को लेकर सख्ती से नियमों का पालन कराता है। ऐसे में जब वर्दीधारी पर ही नियम उल्लंघन के आरोप लगते हैं, तो यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय प्रावधान
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कृत्य मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की
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धारा 129 (हेलमेट अनिवार्यता),
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धारा 146 (वाहन बीमा),
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धारा 190(2) (अनधिकृत साइलेंसर)
के अंतर्गत दंडनीय हो सकता है। इसके साथ ही, एक पुलिसकर्मी द्वारा नियम उल्लंघन सेवा आचरण नियमों के भी विरुद्ध माना जाता है।
निष्पक्ष जांच और विभागीय कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण में नागरिकों और विशेषज्ञों की ओर से यह अपेक्षा जताई जा रही है कि सक्षम प्राधिकारी निष्पक्ष जांच करें और तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून के सामने वर्दीधारी और आम नागरिक समान हैं।
पुलिस की साख और जनविश्वास से जुड़ा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कानून लागू करने वाले ही नियमों के पालन में ढिलाई बरतें, तो इससे जनविश्वास कमजोर होता है। ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई पुलिस विभाग की साख बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है।