नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यपुस्तकों की तैयारी: गुणवत्तापूर्ण किताबें उपलब्ध कराने को पाठ्यपुस्तक निगम प्रतिबद्ध

शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए NCERT मानकों के अनुसार होंगे सभी निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण, कागज चयन और गुणवत्ता से जुड़े सभी निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), NCERT मानकों तथा राज्य शासन और SCERT के निर्देशों के अनुरूप लिए गए हैं। निगम ने कहा कि विद्यार्थियों को पठनीय, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।

कक्षा 1 से 8 तक NCERT आधारित पाठ्यक्रम

निगम के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक की सभी पाठ्यपुस्तकें NCERT आधारित पाठ्यक्रम पर तैयार की जा रही हैं। NCERT-SCERT अनुबंध के तहत आंतरिक पृष्ठों के लिए 80 GSM टेक्स्ट पेपर और कवर के लिए 220 GSM कवर पेपर का उपयोग अनिवार्य है। वहीं कक्षा 9 और 10 की पुस्तकों के लिए 70 GSM कागज का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता और संतुलन दोनों सुनिश्चित होते हैं।

विषयों की संख्या में वृद्धि, योजनाबद्ध तरीके से होगा मुद्रण

नई शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा 1 से 8 तक विषयों की संख्या में वृद्धि की गई है।

  • पहले: 134 विषय

  • शिक्षा सत्र 2026-27: 144 विषय

यह वृद्धि कक्षा 4 और 7 में शासन एवं SCERT के निर्णय के अनुसार की गई है। विषय बढ़ने से कागज की आवश्यकता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, लेकिन निगम ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि अनुमोदित और योजनाबद्ध प्रक्रिया के तहत ही की जा रही है।

कागज की मात्रा पर भ्रम दूर, आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट

निगम ने बताया कि पिछले शिक्षा सत्र में लगभग 2 करोड़ 65 लाख निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण हेतु कुल 11,000 मीट्रिक टन कागज का उपयोग किया गया था। शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए भी लगभग उतनी ही मात्रा में कागज की आवश्यकता अनुमानित है।
इसलिए कागज की असामान्य वृद्धि से जुड़े दावे तथ्यहीन हैं।

बस्ते के वजन बढ़ने के दावों का खंडन

छात्रों के बस्ते का वजन 14 प्रतिशत बढ़ने संबंधी दावों को निगम ने भ्रामक बताया है। निगम का कहना है कि बस्ते का वजन केवल GSM परिवर्तन से तय नहीं होता, बल्कि यह विषयों की संख्या, पृष्ठों की संख्या और पाठ्यक्रम संरचना पर निर्भर करता है।
साथ ही डिजिटल शिक्षण सामग्री, वर्षवार वितरण प्रणाली और अन्य शैक्षणिक उपायों से बस्ते का वजन नियंत्रित रखा जा रहा है।

सख्त निविदा शर्तें, गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं

पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निविदा प्रक्रिया में कड़े मानक लागू किए गए हैं।

  • कागज मिलों से GST क्लीयरेंस सर्टिफिकेट अनिवार्य

  • न्यूनतम 42,000 मीट्रिक टन प्रिंटिंग पेपर आपूर्ति का प्रमाण आवश्यक

इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल अनुभवी और सक्षम कंपनियां ही मुद्रण प्रक्रिया में शामिल हों।

बहु-विभागीय अनुमोदन के बाद ही होते हैं निर्णय

निगम ने बताया कि कागज क्रय और मुद्रण से जुड़े सभी निर्णय निगम की कार्यकारिणी द्वारा अनुमोदन के बाद लिए जाते हैं, जिसमें वित्त विभाग, लोक शिक्षा, समग्र शिक्षा, आदिवासी विकास विभाग, SCERT और शासकीय मुद्रणालय के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

अभिभावकों से अपील: आधिकारिक तथ्यों पर ही भरोसा करें

पाठ्यपुस्तक निगम ने अभिभावकों और शिक्षकों से भ्रम फैलाने वाली सूचनाओं से सावधान रहने की अपील की है। निगम का कहना है कि विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है और नई शिक्षा नीति के अनुरूप पारदर्शी व नियमबद्ध प्रक्रिया के तहत ही पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं।

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