रायपुर। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 की घोषणा के साथ ही छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण सामने आया है। इस प्रतिष्ठित सूची में नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले की 14 वर्षीय जूडो खिलाड़ी योगिता मंडावी का नाम शामिल किया गया है। खास बात यह है कि पूरे छत्तीसगढ़ से योगिता अकेली बाल प्रतिभा हैं, जिन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा।
कम उम्र में अनाथ, लेकिन हौसलों से बनी मिसाल
योगिता मंडावी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बेहद कम उम्र में अनाथ होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खेल को अपना लक्ष्य बनाया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच योगिता ने जूडो में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई, जो लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा है।
खेलो इंडिया से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर
योगिता मंडावी एक खेलो इंडिया राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं और उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम की हैं—
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अस्मिता खेलो इंडिया महिला जूडो लीग 2025- सब-जूनियर 44 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक
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राज्य स्तरीय स्कूल गेम्स 2024-25- अंडर-19 गर्ल्स वर्ग में खिताब
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SGFI नेशनल और खेलो इंडिया लीग जैसी प्रमुख प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन
इन उपलब्धियों के चलते योगिता को भारतीय जूडो की उभरती और प्रेरणादायक युवा प्रतिभाओं में गिना जा रहा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से होगा सम्मान
खेल के क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और संघर्षशीलता के लिए योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न केवल योगिता के लिए, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों के सपनों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आया है।
छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण
योगिता की इस उपलब्धि से यह साबित होता है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। छत्तीसगढ़ की यह बेटी आज पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर रही है।