अगर आप सोचते हैं कि काजू, बादाम या पिस्ता भारत के सबसे महंगे ड्राई फ्रूट हैं, तो आपकी जानकारी पुरानी हो चुकी है. ड्राई फ्रूट्स का असली बादशाह है चिलगोजा! हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों, खासकर किन्नौर जिले में उगने वाला यह दुर्लभ पाइन नट दुनिया के सबसे महंगे ड्राई फ्रूट्स में शुमार है.
बाजार में इसकी कीमत 4,000 से 8,000 रुपये प्रति किलो तक आम है, जबकि प्रीमियम क्वालिटी या जंगली किस्म 10,000 रुपये किलो तक पहुंच जाती है. कुछ रिपोर्ट्स में तो इसे 12,000 तक का भाव बताया गया है, जो काजू (लगभग 800-1,200 रुपये/किलो) से कई गुना महंगा है. आखिर क्यों इतना महंगा बिकता है ये ड्राई फ्रूट?
उगने में लगते हैं सालों
चिलगोजा, जिसे वैज्ञानिक नाम Pinus gerardiana से जाना जाता है, हिमालयी क्षेत्र की ठंडी और ऊंची चोटियों (2,500-3,300 मीटर) पर उगता है. इस पेड़ को फल देने में 20 से 25 साल लग जाते हैं. एक बार पेड़ पर कोन (cones) लगने के बाद भी उन्हें निकालना आसान नहीं होता है. ऊंची और खड़ी चट्टानों पर लगे इन कोन्स को हाथ से तोड़ना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा और मेहनत वाला काम है. कोन को धूप में सुखाने, बीज निकालने और हाथ से छीलने में महीनों लग जाते हैं. यही वजह है कि इसका उत्पादन बहुत सीमित रहता है और कीमत आसमान छूती है.
लोकल मार्केट से हो रहा गायब
हिमाचल के किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे इलाकों में स्थानीय आदिवासी समुदाय इसकी मुख्य कमाई का स्रोत मानते हैं. लेकिन अब समस्या गंभीर हो गई है. अवैध व्यापार (illegal trade) के कारण चिलगोजा बाजार से गायब होता जा रहा है. तस्कर जंगलों से बड़े पैमाने पर चुरा कर इसे कम कीमत में बेच रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान हो रहा है.
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अवैध कटाई और व्यापार से इस पेड़ की संख्या तेजी से घट रही है. सरकार ने संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं. हाल ही में हिमाचल सरकार ने भूटान को 500 चिलगोजा पौधे और 50 किलो बीज भेजे हैं, ताकि वहां भी इसकी खेती शुरू हो सके और भारत में दबाव कम हो.
पोषक तत्वों का खजाना
चिलगोजा सिर्फ महंगा नहीं, बल्कि पोषण का खजाना भी है. इसमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, विटामिन ई, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं. यह हृदय स्वास्थ्य सुधारता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है, वजन नियंत्रण में मदद करता है, त्वचा और बालों को फायदा पहुंचाता है. आयुर्वेद में इसे ‘सुपरफूड’ माना जाता है. लेकिन इतनी ऊंची कीमत के कारण आम आदमी की थाली से दूर रहता है.
शहरों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजन या लोकल ड्राई फ्रूट स्टोर्स पर 100 ग्राम पैक 500-900 रुपये में मिलता है, जबकि 1 किलो 5,000-8,000 रुपये तक. विशेषज्ञों का कहना है कि चिलगोजा की वैज्ञानिक खेती अभी संभव नहीं हो पाई है. हर साल हजारों पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन ठंड और ऊंचाई के कारण बहुत कम जीवित रह पाते हैं. जलवायु परिवर्तन से भी खतरा बढ़ा है. अगर अवैध व्यापार नहीं रोका गया तो यह दुर्लभ ड्राई फ्रूट इतिहास बन सकता है.