न गिलहरी न चूहा: पेट में थैली और लंबी छलांग का हुनर, भारत के पड़ोस में मिला 6000 साल पहले विलुप्‍त अनोखा जीव!

कल्पना कीजिए एक ऐसे जीव की जो किसी गिलहरी की तरह पेड़ों पर दौड़ता है लेकिन उसके पेट पर कंगारू जैसी एक जादुई थैली बनी हुई है. वह एक चूहे जैसा छोटा है लेकिन हवा में सैकड़ों फीट लंबी छलांग लगाकर तैर सकता है. यह किसी हॉरर फिल्म का सीन नहीं बल्कि विज्ञान की दुनिया का सबसे बड़ा सच है. भारत के समुद्री पड़ोसी देश इंडोनेशियाई पापुआ के वर्षावनों में एक ऐसा ‘जिंदा भूत’ मिला है जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. जिसे हम सिर्फ पत्थरों और जीवाश्मों में ढूंढ रहे थे, वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से हमें हकीकत में देख रहा है. यह कहानी है ‘टूस’ की. एक ऐसा जीव जिसे 6,000 साल विलुप्‍त मान लिया गया था.

क्या है यह जीव और क्यों मचा है बवाल?
वैज्ञानिकों ने इसे लाजरस प्रजाति घोषित किया है. यह शब्द उन जीवों के लिए इस्तेमाल होता है जो इतिहास के पन्नों से गायब हो जाते हैं और सदियों बाद अचानक जीवित मिल जाते हैं. यह जीव एक ग्लाइडिंग पॉसम है जो अपनी शारीरिक बनावट और व्यवहार में बेहद अनोखा है.

टूस की 5 सबसे खासियत

·         कंगारू जैसी जादुई थैली: यह एक ‘मार्सुपियल’ जीव है जिसका अर्थ है कि यह अपने नन्हे बच्चों को जन्म देने के बाद पेट पर बनी एक विशेष थैली में सुरक्षित रखता है.

·         हवा में लंबी छलांग (ग्लाइडिंग): इसके पास कुदरती पैराशूट जैसी एक झिल्ली होती है. यह ऊंचे पेड़ों से छलांग लगाकर हवा में तैरते हुए काफी दूर तक जा सकता है.

·         पकड़ने वाली मजबूत पूंछ: इसकी पूंछ का निचला हिस्सा बिना बालों का होता है जो इसे पेड़ की टहनियों को किसी हाथ की तरह मजबूती से पकड़ने की ताकत देता है.

·         निशाचर रक्षक: इसकी बड़ी और चमकदार आंखें इसे रात के घने अंधेरे में भी रास्ता दिखाने और शिकार ढूंढने में मदद करती हैं.

·         दुर्लभ प्रजनन: यह प्रजाति बहुत संवेदनशील है क्योंकि यह साल भर में केवल एक ही बच्चे को जन्म देती है जिससे इसकी आबादी बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है.

गिलहरी समझ बैठने की गलती न करें!
अक्सर लोग इसे ‘उड़ने वाली गिलहरी’ समझ लेते हैं लेकिन विज्ञान के नजरिए से यह बहुत बड़ी गलती होगी. यह जीव कंगारू और कोआला के परिवार (मार्सुपियल) का सदस्य है. जहां गिलहरी पूरी तरह विकसित बच्चों को जन्म देती है, वहीं यह पॉसम अपने बच्चों को थैली में पालकर बड़ा करता है.

अस्‍तित्‍व पर अभी भी खतरा
इस जीव की वापसी जितनी सुखद है, उतनी ही डरावनी भी. पापुआ के जंगलों में हो रही कटाई और वन्यजीव तस्करों की नजर इस मासूम जीव के अस्तित्व को फिर से खत्म कर सकती है. वैज्ञानिकों ने इसकी सुरक्षा के लिए इसके सटीक स्थान को गुप्त रखा है.

सवाल-जवाब
क्या यह जीव भारत में पाया जाता है?

नहीं, यह मुख्य रूप से भारत के पड़ोस में स्थित द्वीप न्यू गिनी (इंडोनेशियाई पापुआ) के जंगलों में पाया जाता है. हालांकि, भारत के नागालैंड में भी 2025 में ‘नागासोरेक्स’ नामक एक नया स्तनधारी जीनस खोजा गया था.

वैज्ञानिकों को इसके जीवित होने का पता कैसे चला?

इसकी शुरुआत 2015 में एक बागान कर्मचारी द्वारा ली गई एक तस्वीर से हुई, जिसे बाद में जीवाश्मों और स्थानीय स्वदेशी ज्ञान के आधार पर पहचाना गया.

‘टूस’ (Tous) नाम का क्या मतलब है?

‘टूस’ एक स्थानीय स्वदेशी शब्द है, जिसका उपयोग वहां के आदिवासी समुदाय इस विशेष प्रजाति के लिए पीढ़ियों से करते आ रहे हैं.

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