मर्डर केस: साली पर बुरी नजर के विवाद में पत्नी की हत्या, पति को उम्रकैद की सजा...

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक सनसनीखेज हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जैजैपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सलनी में अपनी पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी मनोज कुमार टंडन (23 वर्ष) को कोर्ट ने आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) गंगा पटेल ने 11 मार्च को सुनवाई के बाद यह अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और अर्थदंड की सजा दी।

साली पर गलत नजर बनी हत्या की वजह

अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी मनोज टंडन अपनी ही साली पर गलत नजर रखता था। वह मोबाइल फोन के जरिए उससे आपत्तिजनक बातें करता था और उसे अकेले मिलने तथा संबंध बनाने के लिए दबाव डालता था।

जब साली ने इस बारे में अपनी बड़ी बहन ममता टंडन (21 वर्ष) को बताया, तो ममता ने पति से इस संबंध में सवाल किया। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हुआ, जो बाद में खौफनाक घटना में बदल गया।

गुस्से में पत्नी का गला घोंटकर की हत्या

5 जनवरी 2025 को विवाद के दौरान आरोपी ने गुस्से में आकर पत्नी ममता के गले में पड़े गमछे से उसका गला घोंट दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की।

सबूत मिटाने की कोशिश, अधजला गमछा मिला

घटना को छिपाने के लिए आरोपी मनोज टंडन गमछे को तालाब के पास ले जाकर जलाने लगा। लेकिन गमछा पूरी तरह नहीं जल पाया, इसलिए उसने उसे पास ही एक गड्ढे में गाड़ दिया।

पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अधजला गमछा बरामद किया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई, जो कोर्ट में अहम सबूत बनी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों से खुला पूरा मामला

ममता की शादी को 7 साल से कम समय हुआ था, इसलिए पुलिस ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लिया।

6 जनवरी 2025 को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ममता की मौत गला घोंटने से हुई है

कोर्ट में सुनवाई के दौरान:

  • अभियोजन पक्ष ने 18 गवाहों के बयान पेश किए

  • विशेष लोक अभियोजक मुन्ना पटेल ने मजबूत दलीलें दीं

  • सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित किया गया

अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

सभी साक्ष्यों और गवाहों को देखते हुए अदालत ने आरोपी मनोज कुमार टंडन को पत्नी की हत्या का दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास (उम्रकैद) के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई।

इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है।

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