बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीएम-जनमन योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की खरीद में कथित गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद इसे प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की करीब 108 करोड़ रुपये की खरीदी से जुड़ा हुआ था। याचिका में इस खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं और गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि—
- याचिका ठोस और प्रमाणिक सबूतों पर आधारित नहीं थी
- केवल मीडिया रिपोर्ट्स और सामान्य आरोपों के आधार पर दायर की गई थी
- ऐसे मामलों को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता
याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल
अदालत ने याचिकाकर्ता की पात्रता और मंशा पर भी संदेह जताया। कोर्ट के अनुसार यह याचिका वास्तविक जनहित से जुड़ी नहीं लगती, इसलिए इसे आगे सुनवाई के योग्य नहीं माना गया।
वैकल्पिक उपायों का दिया सुझाव
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पास कोई ठोस शिकायत है, तो उसके लिए अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
सुरक्षा राशि लौटाने से भी इंकार
याचिका खारिज होने के साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को जमा की गई सुरक्षा राशि वापस करने से भी मना कर दिया।
क्या है पीएम-जनमन योजना?
पीएम-जनमन योजना के तहत दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट्स चलाई जाती हैं, ताकि लोगों को घर के पास ही इलाज की सुविधा मिल सके।